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‘आर्ट ऑफ डाइंग’ “मृत्यु पर शोक नहीं, उत्सव मनाया जाए- टाइम्स ग्रुप की चेयरपर्सन इंदु जैन का देवलोकगमन

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Channel Mahalaxmi
-
May 17, 2021
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    ‘आर्ट ऑफ डाइंग’ “मृत्यु पर शोक नहीं, उत्सव मनाया जाए। ”

    प्रिय आत्मवर,

    मृत्यु की कला जीने की कला का ही विस्तार होना चाहिए। मैं सौभाग्यशाली रही कि मुझे पुरसुकून और सुविधाओं से संपन्न जिंदगी जीने का मौका मिला। लेकिन मेरी जिंदगी में जो अनकही खुशियां मिलती रहीं, वही मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार रहा है।

    मेरे जीवन का हर पहलू सुकून के साथ चमकता गया और हकीकत यह भी है कि उपलब्धि की हर भावना मेरे अंदर असीम शांति लाती गई। मुझे कभी किसी चीज के लिए तरसना नहीं पड़ा। केवल दुःख का ही अभाव रहा है। अगर वह कमी या भाग्य या कुछ और है, तो भी क्या फर्क पड़ता है।

    बेशक सभी नश्वर प्राणियों की तरह असंतुष्ट महसूस करने के कई अवसर और कारण रहे हैं, लेकिन ऐसे हर अवसर पर मैंने अपने आप से पूछा कि ‘क्या खुद को दुखी होने की सजा देने की कोई जरूरत है?’ इसके जवाब ने हमेशा ऐसे नकारात्मक विचारों को तेजी से दूर किया है। इसी वजह से मेरा यकीन है कि सुख के साथ जीवन से विदाई भी खुशी के चारों ओर ध्वनि और उत्साह के बीच होगी।

    इन सभी वर्षों में मैं हमेशा नए अनुभवों के लिए बेचैन रही हूं। सच कहूं तो ये जिंदगी नीरस हो गई है। एक व्यक्ति को वहां जाने का अधिकार मिला, वह वहां गया और उसने जाकर टी-शर्ट खरीदी। अब एक साहसिक यात्री के तौर पर मैं उस अंतिम सीमा का अनुभव करना चाहती हूं। मुझे अब भी इस पर यकीन है कि मैं जहां पहले कभी नहीं गई, वह अनजान जगह मुझे निराश नहीं करेगी। हर किसी ने इसके रहस्य की बात की है कि उस पार न जाने क्या होगा, उस पार जरूर कुछ नया होगा। मैं इसका पता लगाने के लिए बेसब्र हो रही हूं।

    यह सब कहने के बाद, मैं आराम से जाना चाहूंगी। मृत्यु को बताएं, बहुत अच्छे और सौम्य अंदाज में, थोड़ा इंतजार करें, मैं अपना तकिया ठीक कर लूं और गर्माहट के लिए रजाई में घुस जाऊं। मैं सांसारिक मामले निपटाने को लेकर चिंतित नहीं हूं। भौतिक बंधन पहले से ही खुल चुके हैं, क्योंकि मैं अंतिम मंजिल से पहले अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही हूं। नहीं, बनारस नहीं, यह सांसारिक चिंताओं और शोर से दूर एक शांत आश्रम होगा। मेरे दोस्त मेरे जाने की तैयारी कर रहे हैं।

    जो मेरे करीब हैं, और वास्तव में मुझे जानते हैं, उन्हें पता है कि सांत्वना से भरे शोर की जरूरत नहीं है। वे जानते हैं कि मैं मौत को उसी बेहिसाब उत्सव के साथ गले लगाऊंगी, जिस उत्सव के साथ मैंने जीवन को गले लगाया है। इस जागरूक क्लब में मेरे गुरु भी हैं, जिन्होंने मेरा पालन-पोषण और मुझसे लाड़-प्यार किया है। कभी-कभी मुझे यह सोचकर हंसी आती है कि मेरे लिए शोक कौन मनाएगा। बेचारे। सहज महसूस कराने के लिए उन्हें पीठ पर थपकी की जरूरत होगी, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि मुझे उनके बीच से बाहर जाने में आनंद आ रहा है।

    अगर कोई अंतिम इच्छा है, तो यह है- किसी को भी मेरे जाने की सूचना न दी जाए। किसी को पूछने की जरूरत नहीं है ‘इंदु कहां है?’ क्योंकि जहां भी हंसी होगी, वे उसे वहीं पाएंगे। शरीर के निर्जीव खोल का अंतिम संस्कार उसी तरह करें, जो आश्रमवासी सबसे अच्छा महसूस करें। मेरे गुरु जहां कहीं भी होंगे, निश्चित रूप से मेरे साथ उड़ान भर रहे होंगे। फिर, मैं उड़ जाऊंगी, आग, मिट्टी, पानी, हवा और अंतरिक्ष से लंबे समय से प्रतीक्षित मिलन के लिए…

    हमेशा से तुम सभी में…
    प्रेम सहित.
    इंदु
    मृत्यु एक उत्सव : (पत्र जिसे पढा निधन उपरांत).

    टाइम्स ग्रुप की चेयरपर्सन इंदु जैन के ईश्वरधाम को अकस्मात् प्रस्थान से समस्त मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गयी। एक महान एवं विशाल विभूति होते हुए भी उनमें अपार विनम्रता भरी थी। आपके नेतृत्व में टाइम्स ग्रुप के समस्त प्रकाशनों को रचनात्मकता की एक नयी दिशा प्राप्त हुई। आप मानवता कल्याण को समर्पित रहीं और अपने योगदान से सदा ही समाज को समृद्ध करती रहीं।

    यही नहीं अपने गहन एवं गंभीर चिंतन से भी वो मानवता के प्रति आज की पीढ़ी का मार्गदर्शन प्रदान करती रही हैं। अपने इन्ही उच्च गुणों से ही तो इंदु जैन जी ने हम सब की दृष्टि में एक दिव्य एवं पूजनीय स्थान प्राप्त किया है।

    सांध्य महालक्ष्मी और चैनल महालक्ष्मी की ओर से हार्दिक विनयांजलि

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