1920 में कोहिमा में निर्मित यह जैन मंदिर , दुसरे विश्व युद्ध के दौरान मूर्तियों को यहाँ से कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया था, फिर 62 वर्षो के पश्चात् आचार्य श्री दया सागर जी के सानिध्य में 2003 में वापस यहाँ विराजमान किया गया दश॔न कीजिये ।
तीर्थक्षेत्र कमेटी के शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष शुभारंभ का अभूतपूर्व शंखनाद
25 अक्टूबर 2026 / अश्विन शुक्ल चतुर्दशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
जहां धर्म की ज्योति जले, हर दिल में विश्वास जगे,
मथुरा...
















