॰ वैश्विक संघर्ष के कारण और निवारण
॰ हिंसा, वर्चस्व, कब्जा और संघर्ष का क्या है सोल्यूशन
॰ अधिक लालच, विस्तारवाद का क्या है समाधान
॰ आज वॉर रूम्स की नहीं, जरूरत पीस रूम्स की
॰ महावीर स्वामी दर्शन की GRAP कार्ययोजना
आज पूरी दुनिया बारूदी ढेर पर खड़ी है, एक तरफ आधुनिकतम हथियारों की होड़ में अपने को श्रेष्ठतम साबित करने और दूसरे कब्जाने की होड़ है, वहीं दूसरी और वैचारिक संकीर्णता ने पूरी दुनिया को स्थिरता से अस्थिरता के सागर में ढकेल दिया है और ऐसे में ‘सर्वाइवल किट’ यानि अस्तित्व रक्षा के साधन बन सकते हैं तीर्थंकर महावीर स्वामी के अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांत। महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक के अवसर पर चैनल महालक्ष्मी आगे बढ़ने से पहले वर्तमान के प्रमुख युद्धों से बढ़ता समूचे विश्व के लिए जीवन संघर्ष और उसके समाधान के लिए महावीर स्वामी के दर्शन की ओर देखने का एक प्रयास करता है:-
1. प्रमुख वैश्विक संघर्ष और क्या है उनके कारण?
यह मानना होगा कि दुनिया में संघर्ष के केंद्र केवल जमीन नहीं, बल्कि संसाधन और अहंकार भी हैं।
॰ अमरीका-इजरायल बनाम ईरान: वर्तमान में अपने विरोधी को उठने से पहले और उसको सैन्य शक्ति की दिशा में न बढ़ने और समूल नष्ट करने के लिये तबाही का जो मंजर 3-4 हफ्तों में देखा है, उस संघर्ष में बदले की भावना, दूसरे क्षेत्रों में नियंत्रण के चलते आज पूरा विश्व एनर्जी परोक्ष रूप से उसकी त्रासदी झेलने को मजबूर है।
॰ रूस बनाम यूक्रेन : सत्ता और सुरक्षा के संघर्ष अंतहीन रूप में परिणीत हो चुका है, यह युद्ध वर्चस्व और नाटो के विस्तारवाद की परिणति है। यहां ‘अहंकार’ और ‘अविश्वास’ ने लाखों लोगों का जीवन संकट में डाल दिया है।
॰ इजरायल – हमास/ हिजबुल्ला:– यह प्रतिशोध और आतंकवाद का जोड़ है। मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष बदले की भावना का सबसे क्रूर उदाहरण है। यहां, आतंकवाद और सैन्य बल के बीच विशेषकर लेबनान व फिलीस्तीन के आम नागरिक पिस रहे हैं और रोज नई तबाही के चित्र देखे जा रहे हैं।
॰ पाकिस्तान बनाम अफगानिस्तान : अपने यहां आतंकी फसल बोने वाला पाकिस्तान अब स्वयं उसे काटने को मजबूर है और यह सीमित संषर्ष कब बड़ा रूप ले ले, कहा नहीं जा सकता।
॰ म्यांमार बनाम सूडान : सत्ता मोह और गृहयुद्ध का परिणाम है यह खूनी संषर्ष। इन देशों में आंतरिक सत्ता हथियाने की होड़ ने मानवीय संवेदनाओं को समाप्त कर दिया है।
॰ दक्षिण चीन सागर वर्चस्व : यह संसाधनों पर कब्जे की भूख का परिणाम है। यहां आर्थिक विस्तारवाद और समुद्री सीमाओं पर प्रभुत्व जमाने की कोशिशें विकराल रूप बनने की आहट दे रही हैं।
वर्तमान हिंसा, वर्चस्व, कब्जा, संषर्ष का एकमात्र परिवाद है अहिंसा
पहले इस बात को समझना होगा कि महावीर की अहिंसा कायरता नहीं, निडरता है, ‘अभय’ का सूचक हैं। आज इन युद्धों से पूरा विश्व जैसे बारूद के ढेर पर बैठ गया है, लगातार एटोमिक वॉरफेयर का खतरा है। एनर्जी भण्डारों पर हमलों ने पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मचा दी है। तब इस अहिंसा को समझना और ग्रहण करना एकमात्र सोल्यूशन नजर आता है।
॰ वैचारिक अहिंसा यानि अनेकांतवाद : युद्ध क्यों शुरू होते हैं? पहले इस पर कभी चिंतन किया? जब हम मानते हैं कि ‘सिर्फ मैं सही हूं’, तब तनाव से युद्ध शुरू होते हैं। महावीर स्वामी का ‘अनेकांतवाद’ सिखाता है कि सत्य के कई पहलू हैं। यदि अमरीका और ईरान, या रूस और यूक्रेन या इजरायल और फिलीस्तीन एक-दूसरे के दृष्टिकोण को स्थान दें, तो निश्चित ही संवाद की गुंजाइश बनेगी।
॰ हृदय परिवर्तन: सान्ध्य महालक्ष्मी का मानना है कि आतंकवाद का इलाज केवल गोली नहीं है, क्योंकि मन में उमड़ते विचारों को गोली से नहीं मारा जा सकता। महावीर स्वामी के अनुसार शत्रुता को मैत्री से ही जीता जा सकता है, हिंसा तो केवल एक और नई हिंसा को जन्म देती है।
अधिक लालच और विस्तारवाद का एक ही समाधान : अपरिग्रह
आज अधिकतर युद्ध ‘अपरिग्रह’ के अभाव के कारण ही लड़े जा रहे हैं। जब कोई देश दूसरे की जमीन का तेल, गैस, खनिज यानि प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है, तो वह अत्याधिक संग्रह या कहें परिग्रह का शिकार होता है।

वर्तमान में बारूदी मुहाने पर बैठे विश्व में अपरिग्रह की प्रासंगकिता-
॰ संसाधनों का हो समान वितरण : यदि दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र संसाधनों में संयम रखें, तो विश्व में गरीबी और उससे उपजने वाला आतंकवाद स्वत: कम हो जाएगा।
॰ पर्यावरणीय अहिंसा: अपरिग्रह हमें सिखाता है कि प्रकृति का दोहन न करें।
॰ इच्छाओं पर नियंत्रण: ‘दिल मांगे मोर’ यानि अधिक पाने की लालसा ही, युद्ध का मूल कारण है। महावीर स्वामी का अपरिग्रह व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर संतोष दिखाता है।
बारूद पर बैठी दुनिया के लिये एकमात्र विकल्प
आज दुनिया जिस दोराहे पर खड़ी है, वहां से विकल्प के रूप में दो ही रास्ते हैं, पहला युद्ध और दूसरा बुद्ध यानि महावीर का मार्ग ‘जियो और जीने दो’।
अहिंसा का मतलब यह नहीं कि वह इंसानों के प्रति ही हो, बल्कि सूक्ष्म जीवों और पर्यावरण के प्रति भी होनी चाहिए। यदि विश्व के बड़े नेता ‘स्याद्वाद’ को अपनी विदेश नीति में शामिल करें और ‘अपरिग्रह’ को अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बना दें, तो निश्चित ही फैलते आंतकवाद और युद्धों के इस दानवी कहर को शांत किया जा सकता है। बारूद के ढेर में छिपी अग्नि को केवल, शांति और करुणा के शीतल जल से ही शांत किया जा सकता है।
वर्तमान विश्व में बढ़ती उथल-पुथल, परमाणु हथियारों की होड़ और अपने दबदबे की कोशिश, आतंकवाद के दानवी कहर को शांत करने के लिए महावीर स्वामी का त्रिसूत्रीय दर्शन यानि अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद पर आधारित एक ‘वैश्विक’ शांति कार्य योजना यानि GRAP – ग्लोबल पीस एक्शन प्लान पर केन्द्रित करना होगा और यही योजना कारगर डिप्लोमेसी और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका हो सकती है।

महावीर स्वामी के दर्शन के आधुनिक अनुप्रयोग पर आधारित GRAP कार्ययोजना इस रूप में हो सकती है:-
1. वैचारिक स्तर:- ‘अनेकांतवाद’ आधारित कूटनीति आज बढ़ते, फैलते युद्धों का कारण संक्षिप्त में देखें तो वह मूल कारण है – ‘मेरा सत्य ही एकमात्र सत्य है’ का अहंकार है।
क्या है समाधान? UN जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ‘एबसोल्यूट ट्र ूथ’ की बजाय ‘रिलेटिव ट्र ूथ’ को जगह दी जाये। यदि इजारयल-अमरीका बनाम ईरान, रूस बनाम यूक्रेन, इजरायल बनाम हमास, पाक बनाम अफगान, एक-दूसरे के ऐतिहासिक और सुरक्षा संबंधी दावों को आंशिक सत्य के रूप में स्वीकार करें, तो संवाद के द्वार खुलेंगे ही।
1. करना क्या होगा? – विवादित देशों के बीच ‘कनफ्लिक्ट रिसोल्यूशन सेल्स’ की स्थापना हो, जो किसी भी विवाद को ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ देखने की बजाय उसके मल्टीडाइमेंशनल पहलुओं पर विचार करे।
2. आर्थिक स्तर – ‘अपरिग्रह’ आधारित संसाधन प्रबंधन यानि सोशियो इकनोमिक इक्विटी – वर्तमान में युद्धों का ध्रुवीकरण तेल, गैस, खनिज, भूमि पर कब्जे के लिये किये जा रहे हैं। आतंकवाद की जड़ें भी आर्थिक असमानता में छिपी हैं।
क्या है समाधान : सीमित परिग्रह-विकसित राष्ट्र अपनी उपभोगवादी प्रकृति पर नियंत्रण रखे। महावीर स्वामी का ‘अपरिग्रह’ सिद्धांत स्पष्ट करता है कि संग्रह उतना ही हो, जितनी आवश्यकता हो।
ऐसी हो कार्य योजना : एक ‘ग्लोबल रिसोर्स शेयरिंग पूल’ बनाया जाए। यदि शक्तिशाली देश अपने संसाधनों के संयम को कम कर विकासशील देशों की बुनियादी जरूरतों जैसे भोजन, शिक्षा आदि में निवेश करें, तो कट्टरपंथ और आतंकवाद की जमीन स्वत: समाप्त हो जायेगी।
3. सैन्य स्तर: अहिंसा और निरस्त्रीकरण – आज दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी है, क्योंकि हमने रक्षा के नाम पर विनाश को प्राथमिकता दी है।
भावहिंसा रूपी समाधान- अहिंसा केवल शस्त्र त्यागना नहीं, बल्कि शत्रुता के भाव का त्याग है।
क्या हो कार्ययोजना : ईरान पर अमरीका इजरायल समेत कई देशों के हमले परमाणु हथियारों के उत्पादन को लेकर युद्ध हुआ, जो रोज नई दिशा में बढ़ता जा रहा है। इसकी बजाय परमाणु हथियारों को धीरे-धीरे समाप्त करने के लिए ‘अहिंसा’ को एक सैन्य प्रोटोकोल के रूप में वैश्विक स्तर पर कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए।
सुरक्षा से विकास: आज पूरा विश्व सैन्य हथियार बजट को बढ़ाने में लगा है, ऐसे में उस बजट का 10 फीसदी जल-वायु परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन के लिये ‘अहिंसा कोष’ के रूप में आरक्षित किया जाना चाहिए।
आतंकवाद का अहिंसक उपचार: ध्यान रखना होगा कि आतंकवाद एक मानसिक बीमारी है, जिसे बम से नहीं, करुणा से जीता जा सकता है।
जरूरत शिक्षा में अहिंसा की : विश्व स्तर पर पाठ्यक्रम में ‘पीस स्टडीज’ और महावीर स्वामी के ‘जियो और जीने दो’ के दर्शन को अनिवार्य किया जाये।
क्षमाभाव : प्रतिशोध की अग्नि को बुझाने के लिए राजनीतिज्ञों को ‘क्षमा’ को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में अपनाना होगा। महावीर स्वामी ने कहा भी है कि ‘क्षमा वीरस्य भूषणम्’ क्षमा ही वीरों का आभूषण है।
पूरी दुनिया में आज ‘वॉर रूम्स’ की नहीं, ‘पीस रूम्स’ की जरूरत है। महावीर स्वामी का दर्शन आज के ‘बारूद’ के लिए ‘शीतल जल’ के समान है। यदि हम अपनी इच्छाओं को अपरिग्रह, विचारों को अनेकांतवाद और कर्मों में अहिंसा के रूप में बदलाव लाते हैं, तो मानवता का अस्तित्व निश्चित ही सुरक्षित रह सकता है।
चैनल महालक्ष्मी अपील – महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक पर सभी आयोजन, विधान, गुणगान, शांतिधारा में विश्व शांति- विश्व मैत्री की अपील हो, प्रार्थना हो, विनती हो। सच्चे मन व श्रद्धा का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा, यही विश्वास है।















