दुधई तीर्थ की दुर्दशा, क्यों जैनों के साथ सौतेला व्यवहार?

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23 फरवरी 2026 / फाल्गुन शुक्ल सप्तमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
9वीं सदी का यूपी के ललितपुर जिले के दुधई में स्थित तीर्थंकर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन जिनालय, जो एक समय अपनी प्राचीनता व अतिशय के कारण चमत्कारी तीर्थक्षेत्र के रूप में तब दर्ज हो गया, जब जिनालय के अंदर बूंदों के रूप में बारिश होने लगी। 200 साल पहले भी यह जिनालय जीर्ण-क्षीण अवस्था में था, तब संवत 1927 में मुनि श्री सूर्य सागरजी के आगमन पर स्थानीय लोगों ने जीर्णोद्धार किया।

यह प्राचीन ऐतिहासिक जिनालय है, जहां तक जाने के लिये न तो सड़क है, न रोशनी के लिये लाइट व्यवस्था, न पीने के लिए पानी। यहां 14 फीट उतंग खड्गासन तीर्थंकर श्री शांतिनाथ जी की प्रतिमा है। यह जिनालय 9वीं सदी का है, जबकि प्रतिमायें 8वीं सदी की हैं, यहां 5 खड्गासन और 2 पदमासन प्रतिमायें हैं।

ललितपुर से लगभग 25 किमी दूरी पर यह जिनालय कब से जीर्णोद्धार व मूलभत सुविधाओं के लिए राह देख रहा है। तीर्थयात्रियों की अनदेखी का भी यह एक बड़ा कारण है। पुरातात्विक ऐतिहासिक अनेक प्रतिमायें यहां-वहां बिखरी पड़ी हैं। क्या प्रशासन की नजर इस पर पड़ेगी?

इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3628 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन – आज जगह-जगह जैन प्राचीन संस्कृति बिखरी पड़ी है, उसको संजोना और वहां पर मूलभूत सुविधायें न प्रदान करवाना, संकेत करता है यह सोचने के लिये कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ कहने वाली सरकार और प्रशासन जैनों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रहा है?