आचार्य प्रज्ञ सागरजी ने किया गुरुवर – समाज – राष्ट्र का गुणानुवाद
30 जून 2025 / आषाढ़ शुक्ल पंचमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आचार्य श्री विद्यानंद जी महामुनिराज के जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शनिवार 28 जून 2025 को किया गया, उस अवसर पर आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी द्वारा उन्हें ‘धर्म चक्रवर्ती’ उपाधि से सम्मानित किया गया। उस पर स्वयं मोदी जी ने कहा कि मैं इसके योग्य तो नहीं हूं, पर संत के द्वारा दिये प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लेता हूं और मां भारती के चरणों में समर्पित करता हूं।
इस कार्यक्रम में जहां आचार्य श्री विद्यानन्द जी के जीवन चारित्र को रेखांकित किया गया, उनकी समाज व राष्ट्र के प्रति किये गये कार्यों उपलब्धियों को प्रकाशित किया। इस अवसर पर उनकी स्मृति में डाक टिकट, 100 रुपये के सिक्के का लोकार्पण व उनके जीवन पर लिखी पुस्तक का विमोजन भी मोदी जी द्वारा किया गया।

सब कुछ अच्छा, पर गिरनार पर चुप्पी, क्यों?
पूरे कार्यक्रम में जैनों के इतिहास को, वर्तमान में सुधार को, जैनों के लिये सहयोग को, राष्ट्र प्रेम को – सबकुछ अच्छा रहा, पर वहां मौजूद देश की लगभग सभी बड़ी संस्थाओं के प्रमुखों में से किसी ने गिरनार के प्रति कोई ज्ञापन, कोई शब्द नहीं बोला। यहां तक कि उनके बगल में बैठे भाजपा सांसद नवीन जैन जी ने दो दिन पहले गिरनारजी के बारे में पत्र तो मोदी जी को लिखा, पर जैनों के मंच पर ही उनके साथ सवा घंटे बैठे रहने के बावजूद जैनों के लिये गिरनार में जयकारा, पूजा अधिकार पर एक शब्द नहीं बोला। यह कार्यक्रम के प्रोटोकोल में शामिल था या फिर अपने ही मंच पर चुप रहने की पुरानी आदत। आज देश भर के जैन समाज की नजरें जब गिरनार पर थी, तब कुछ आश्वासन की उम्मीद की किरण तो बिखेरी जा सकती थी। आज जहां एक संत ने कई सामाजिक सुधार की मांग रखी, उन पर प्रधानमंत्री महोदय कुछ तो बात कह सकते थे। वे सब जानते हैं, पर जैनों का शायद केवल तालियां पीटने में ही पूरा मजा आता है।

हम किसी को छेड़ते नहीं और कोई छेड़े, तो छोड़ते नहीं
परम्पराचार्य आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी द्वारा इस अवसर पर आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि हम किसी को छेड़ते नहीं और कोई छेड़ता है तो छोड़ते नहीं। पूरे सभागार ने तालियों से स्वागत किया और जब उसी प्रसंग को मोदी जी ने दोहराते हुए सिर्फ आधी लाइन बोली कि अभी संत जी ने कहा कि हम किसी को छेड़ते नहीं, तब चंद मिनट तालियां की आवाज गूंजती रही और उन्होंने मुस्करा कर चुटकी ली, अरे भाइयों, मैं जैनों के कार्यक्रम में हूं और अहिंसा के, आपने तो तालियों से मेरे अधूरे वाक्य को पूरा कर दिया।

भरत चक्रवर्ती के नाम हमारे देश का नाम भारत पड़ा
अभी भारत सरकार द्वारा राजपथ का नाम कर्तव्य पथ किया गया, इस बात को आगे बढ़ाते हुये आचार्य श्री ने कहा कि इण्डिया गेट का नाम भी ‘भारत द्वार’कर देना चाहिये और इस पर जोर देते हुये कहा कि वही भारत, जो नाम हमें प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ जी के ज्येष्ठ पुत्र भरत चक्रवर्ती से मिला। (यह स्पष्ट कर रहा था कि सरकार द्वारा भारत देश का नाम शकुंतला पुत्र भरत के नाम पर पड़ा, वह सही नहीं है)।
बंद हो पशुबलि और कुर्बानी के नाम पर जीव हत्या
आचार्य श्री ने इस बात पर जोर देते हुये कहा कि अहिंसा-शाकाहार देश में जीव हत्याओं पर रोक लगनी चाहिए। जीव हत्या किसी भी रूप में हो, पशुबलि या कुर्बानी रुकनी चाहिये। इस पर कोई प्रति उत्तर नहीं मिला।
संस्कृत और प्राकृत भाषा को झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाया
इस बात को भी दोहराया कि प्राकृत भाषा जिसे गत वर्ष अक्टूबर में सरकार ने शास्त्रीय भाषा घोषित किया, उसके तथा ब्राह्मी लिपि के प्रचार-प्रसार की शुरूआत आचार्य श्री विद्यानंद जी ने की, उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत और प्राकृत को झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाया।
अटल जी ने सौ करोड़ दिये और मोदी जी अब इतने से काम नहीं चलेगा
आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी ने पिछली उपलब्धियों को स्मरित करते हुये यह भी कहा कि महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण महोत्सव के समय आचार्य श्री विद्यानंद जी ने जैन चिह्नों की शुरूआत की। तब भी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उपस्थित थीं, फिर उनके 2600वें जन्म कल्याणक महोत्सव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 100 करोड़ का अनुदान जैन समाज को दिया, अब मोदी जी 100 करोड़ से काम नहीं चलेगा। पर मोदी जी ने इस बात पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

धर्मायतनों के पास बंद हो मयखाने
आचार्य श्री ने पुरजोर से कहा कि धर्मायतनों, तीर्थस्थलों के क्षेत्रों को पवित्र रखा जाये। हिग्लिंश रूप में उन्होंने कहा कि धर्मायात्नों के क्षेत्रों में किसी भी शराब-मांस की खरीद बिक्री पर रोक लगाई जाये।
मोदी जी ने 9 संकल्प फिर दोहराये
णमोकार दिवस पर प्रधानमंत्री जी ने 9 संकल्प जन-जन के लिये बताये थे, अब फिर वो दोहराये, उसके साथ उन्होंने इस 28 जून को खास 1987 से जोड़ा, वही दिन जिस दिन आचार्य श्री विद्यानन्द जी को आचार्य पद मिला था। हां, वो नौ संकल्प –
पहला संकल्प- बूंद-बूंद पानी बचाने का
दूसरा – एक पेड़ मां के नाम उगाने का, सींचे।
तीसरा – साफ सफाई स्वच्छता हर जगह।
चौथा – वोकल फॉर लोकल यानि भारतीय उत्पाद को बढ़ावा।
पांचवां – देश का दर्शन यानि अपने भारत को जानो।
छठां – नेचुरल फार्मिंग यानि रसायनों से दूर खेती।
सातवां – हेल्दी लाइफ स्टाइल – तेल का कम उपयोग।
आठवां – योग और खेल को दैनिक जिंदगी का हिस्सा बनाना और
नौवां संकल्प – गरीब का सहयोग करना।
इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री गहलोत जी, श्रवणबेलगोल के भट्टारकजी, राज्यसभा सांसद नवीन जैन तथा अनेक संस्थाओं के विशिष्ट श्रेष्ठी भी उपस्थित रहे।
पूर्ण जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3384 में देखिये।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : भरत चक्रवर्ती के नाम पर भारत देश का नाम, कुर्बानी-पशुबलि के नाम पर जीव हत्या पर रोक, धर्मायतनों के पास मयखानों को रोक, सरकार से अनुदान के प्रयास, बहुत अच्छे कदम रहे आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी के। पर वहां मौजूद अनेक जैन संस्थाओं के प्रमुखों में से कोई इतनी बात अपने मंच से नहीं कर सका कि 2009 व 2013 में मुख्यमंत्री के पद पर बैठे मोदी जी ने गिरनार के बारे में जैनों को बहुत आश्वासन दिये पर, 11 साल से प्रधानमंत्री पद पर होने के बावजूद आज तक न्याय नहीं किया और वहां लगातार बदलाव किये जाते रहे।















