॰ ‘हम ही कमेटी, हम ही मेम्बर, हम ही एजीएम’- कमेटी का स्पष्ट ऐलान
॰ जैन मंदिर से सटी स्कूल बिल्डिंग में समाज ने सहयोग दिया, अब महामंत्री ने स्पष्ट कहा, बिल्डिंग में नॉन जैन स्कूल खुलवाया है, उनके माता-पिता दिगंबर साधुओं को देखना नहीं चाहते हैं। कमेटी का साधु विरोधी रवैया!
॰ साधु को बुलाने के लिये हम बार-बार चक्कर नहीं लगा सकते, कहना है कमेटी का – कही देखी है ऐसी कमेटी!
॰ 15 मई को कमेटी ने मीटिंग बुलाई और मारपीट के लिये तैयारी रखी
॰ जब उनकी अपशब्द, गुंडागर्दी, दादागिरी नहीं चली, तो मैनेजमेंट ने उस आरोपी को संकेत किया और पिल पड़ा- यह कहना है कमेटी के विश्वस्त सूत्रों का
॰ इतनी गुण्डागर्दी पूरे देश में आज तक नहीं देखी
॰ घटना से पहले किसो को नहीं मालूम, कौन-सी कमेटी, आनन-फानन में लगाया बोर्ड

23 मई 2025 / जयेष्ठ कृष्ण दशमी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
जागृति एन्क्लेव (दिल्ली)। 16 मई 2025 रात्रि 8 बजे मंदिर के साथ स्कूल बिल्डिंग में कमेटी ने मीटिंग रखी, सकल जैन समाज यही कहता रहा पारस प्रभु के समोशरण के नीचे रखने से सब जिन और जिनालय की गरिमा रखते हुये संयमित व अनुशासित रूप से मीटिंग हो सके। पर महामंत्री जी ने कहा मर्जी हमारी चलेगी। देख लो आप। समाज चाहता था कि हल निकले, सब ना चाहते हुए स्कूल बिल्डिंग के बेसमेंट में पहुंचे। पीछे का दरवाजा बंद था और दूसरे वाला आधा ही खुला था और उसके आगे वो बैठे थे, जिन्होंने मारपीट का इंतजाम किया था।
सान्ध्य महालक्ष्मी ने सब को स्पष्ट कहा था कि इस कमेटी ने उपाध्याय श्री गुप्ति सागरजी मुनिराज के परम सान्निध्य में मात्र नौ माह में मंदिर खड़ा कर दिया और 28 अप्रैल से 02 मई 2006 तक उस भव्य पंचकल्याणक में सान्ध्य महालक्ष्मी भी मौजूद थी, जब स्कूल बिल्डिंग का शिलान्यास व लोकार्पण में भी मौजूद थे। पर कमेटी ने उपाध्याय श्री को पिछले 8-10 बरसों में वह गरिमामय सम्मान नहीं दिया, काफी समय आसपास विहार के बावजूद कमेटी नहीं पहुंची ।

बात हो रही थी 16 मई 2025 की मीटिंग, इनके रंग काले-पीले पिछले 10 साल से कई बार देख चुके हैं। पर जो उस दिन हुआ, वो पूरी सोची-समझी साजिश के तहत हुआ। अगर हम बोलेंगे, तो कमेटी कहेगी, हमें बदनाम करने के अलावा और क्या काम है? इस कमेटी में दो-तीन सामान्य सदस्यों को छोड़कर। प्रधान तो कहते भी हैं हमारे बस की बात नहीं है, हमारा मन नहीं करता। पर 16 मई के तीसरे दिन कमेटी एक वरिष्ठ सदस्य जिनके भीतर नोटों की गर्मी नहीं, हर बात को धर्म की नींव पर कहने का सामर्थ्य रखते हैं, पिछले 10 सालों से उनसे धर्म पर चर्चा होती रहती है उन्होंने रविवार 18 मई को हमसे फोन करके जो बाते कहीं उनको सुनकर, पूरे देश की कमेटियों के लिये शर्मसार होने के अलावा कुछ नहीं शेष है। उन्होंने कहा कि पूरे जैन समाज के साथ जान-बूझकर अन्याय हुआ। मारपीट करने वाले को कमेटी ने ही जानबूझकर बुलाया। एक संरक्षक डी के जैन ने हमारे प्रति अपशब्द कहे, गरिमामय भाषा का चीरहरण! अगर हकीकत में जिंदा कमेटी होती, तो तभी संरक्षक महोदय को चुप कराती या उनकी बात की निंदा करती पर कमेटी के सब गर्दन झुकाये बैठे रहे।
संरक्षक डी के जैन ने अपनी तेज, असभ्य, भाषा में कहना शुरू किया और बोले – क्या चाहते हो? इस पर कमेटी के वो धर्मप्रेमी विश्वस्त सूत्र ने स्वयं माना कि उस समय जो भी आपके प्रति बोला गया, वह किसी को स्वीकार्य नहीं होगा।

खैर, जब अपशब्दों की, गंदगी भरी बातें कहने का सिलसिला थमा नहीं, तब हमने खड़े होकर, पूरी कमेटी से हाथ जोड़कर स्पष्ट कह दिया कि बहुत हो चुका। जहां सम्मान न हो, मर्यादा न हो, वहां एक मिनट भी मत बैठिये, चल दिये हम सब एक-एक करके बाहर उस आधे खुले दरवाजे से।
रखो सारी डिमाण्ड, हम हर का जवाब देंगे। सान्ध्य महालक्ष्मी ने हाथ जोड़कर विनम्रता के साथ कहा – समाज सिर्फ बात चाहता है, कि जब से मंदिर बना है कोई एजीएम नहीं हुई, कृपया जल्द बुलायें, उसमें कमेटी के पुनर्गठन की घोषणा हो, चुनाव हो और हर तीन साल में, साथ ही उसमें हिसाब-खाते स्वीकृत करायें। इसके अलावा समाज को कुछ नहीं चाहिये।
अब प्रधान जी ने जोर-जोर से बोलना शुरू किया – मैं एक सीए हूं, हर मिनट हमारा बहुत कीमती है। वैसे ये प्रधान जी, जब भी मांग उठती है तो इस्तीफा दे देते हैं, बस दबाव बनाने के लिए। ये कुछ साल पहले भी इस्तीफा देने के नाटक कर चुके हैं। उस समय यह अपना इस्तीफा मंदिर-स्कूल बिल्डिंग में बहुत सहयोग करने वाले के कार्यालय में देकर आये, तब कमेटी के कुछ चुनिंदा लोगों ने संकेत कर दिये कि इस्तीफा स्वीकार कर लें। हर बार नाटकबाजी करने वाले प्रधान को, इसकी कल्पना भी नहीं थी, फिर हर के पास नाक रगड़ी, तो इस्तीफा वापस लिया।

उस मीटिंग में एक संरक्षक दादागिरी की सभी सीमाओं को पार करते हुए कहते हैं – तू होता कौन है? चुनाव के चक्कर में समाज में झगड़ा करवाना चाहता है, सुन लो। यही कमेटी है, यही सदस्य हैं, यही एजीएम है, यही बोर्ड मीटिंग है, फिर जब भाषा मर्यादा हीन हो गई। 20-25 साल पहले बनी कमेटी ही रहेगी कोई चुनाव नहीं और अपशब्द बोले। हमने समाज से कहा कोई भी गलत शब्द नहीं बोलेगा, किसी ने नहीं बोला, पर उनकी तरफ चार-पांच ने खूब मर्यादाएं तोड़ी। हमने हाथ जोड़कर कहा कि कमेटी के ऐसे शब्द कभी स्वीकार्य नहीं, हम उठ रहे हैं और एक-एक करके उठकर उस आधे – खुले दरवाजे से बाहर निकलने लगे। बेसमेंट से धीरे-धीरे ऊपर आने लगे। सबसे आखिर में समाज का होनहार बेटा जिसने जहां 7-8 लोग अभिषेक करते थे, जागरूकता कर, महीने के पहले रविवार 50-60 को स्वयं फोन कर मंदिर आने को कहते थे। कमेटी के एक व्यक्ति ने बताया कि कमेटी के इशारे पर एक ने कोहली भर ली और जिसको मारपीट के लिये बुलाया था, उसने हमला कर दिया। उन्हीं के आगे चल रहे समाज के अन्य व्यक्ति राकेश जी ने, सान्ध्य महालक्ष्मी को स्पष्ट बताया, कई ने कहा, थाने में पुष्टि की।

सब समाज आनंद विहार थाने पहुंचा, कहा गया कि वहां जैन समाज के लोग पहुंचे। सब चार घंटे उसके लिये खड़े रहे। कमेटी कहती है आप केवल 20 लोग हैं और उन्हीं की ओर से कहते हैं समाज के 40-50 लोग घंटों वहां थाने में खड़ेथे। पर कमेटी का एक व्यक्ति नहीं था।

अब इस पर क्या कदम उठाये जा सकते हैं। सान्ध्य महालक्ष्मी के पास, समाज के लोगों के पास कई के फोन, मैसेज आ रहे हैं, उस पर सामूहिक निर्णय दादागिरी वाली कमेटी के खिलाफ, पहले यमुनापार दिगंबर जैन समाज के सान्निध्य में।
सान्ध्य महालक्ष्मी चिंतन: ॰ साधुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाली कमेटी के विरोध में हो, पूरी दिल्ली की कमेटियों की सामूहिक बैठक ॰ 20-25 साल से कुर्सी न छोड़ने वालों के खिलाफ विभिन्न मंचों पर हो कार्यवाही।














