तीर्थ सुरक्षा के लिए आचार्य श्री विमर्श सागरजी की सार्थक पहल ॰ तीर्थ चक्रवर्ती बन सहयोग कीजिये, तीर्थ सुरक्षित करिये

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॰ वर्तमान में साधुओं का आशीर्वाद व समाज से संवाद सही कदम
॰ शिखरजी के लिये दान तीर्थक्षेत्र कमेटी कार्यालय में ही देना होगा
॰ सभी तीर्थ चक्रवर्तियों की फोटो सहित जानकारी सान्ध्य महालक्ष्मी व तीर्थ वंदना में दी जायेगी

01 दिसंबर 2025 / मंगसिर शुक्ल एकादशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
‘आज हम अपने तीर्थों की गरिमा, पावनता भूलते जा रहे हैं, तीर्थों की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है, वो हमारी सुरक्षा करते हैं। हमें उनके प्रति अपना कर्तव्य निभाना ही होगा। जैसे अपने बच्चों की परवरिश में सुख-सुविधाओं के लिये अपना धन-समय लगाते हो, वैसे ही इन तीर्थों के लिए दोनों हाथ सेवा करो, सहयोग करो। तीर्थयात्रा-तीर्थ सहयोग से तुम्हारे कितने ही अशुभ कर्मों का क्षय होता है’ मुजफ्फरनगर में कल्पद्रुम विधान के दौरान इसी के साथ आचार्य श्री विमर्श सागरजी ने सभी से अपने कर्मों के नाश करने और वर्तमान में दिख रहे खतरों व जीर्णोद्धार की आवश्यकता के चलते 24 व 29 नवम्बर को भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के हाथ मजबूत करने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि यह कल्पद्रुम विधान चक्रवर्ती करते हैं, वह भी एच्छिक दान देकर, यह विधान आयोजित करते हैं, इसी तरह अब तीर्थों की सुरक्षा के लिये चक्रवर्तियों की जरूरत है। आज इसी स्थल से तीर्थ चक्रवर्तियों की शुरूआत करते हैं। वैसे भी तीर्थक्षेत्र कमेटी 125वें वर्ष में आगामी 22 अक्टूबर को प्रवेश करने वाली है।

आचार्य श्री ने जैसे ही यह अपील की, विधान करवा रहे पुण्यांश भैया ने अपील की और 11 ने अपनी चंचला लक्ष्मी तीर्थों के लिये देने की घोषणा कर दी और बन गये पहले 11 तीर्थ चक्रवर्ती, सभी ने एक लाख 8 हजार रुपये का सहयोग देने की बात स्वीकार की। उन सभी का उचित समय पर तीर्थक्षेत्र कमेटी सम्मान ही नहीं करेगी, बल्कि पुण्यांश भैया के कहे अनुसार सभी के चित्र सान्ध्य महालक्ष्मी व तीर्थवंदना पत्रिका में भी प्रकाशित किये जाएंगे और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बनेंगे।

आचार्य श्री ने कहा कि ‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी यहां पर उपस्थित हुई है और वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन, जवाहर लाल जी और हमारे चैनल महालक्ष्मी के शरद जैन जी, हां इनका चैनल अपनी जगह पर और तीर्थ संरक्षण के लिए अपना जो प्रयास है, शरद जी का, वो अपनी जगह है। बहुत प्रयास, पुरुषार्थ, द्रव्य और परिश्रम। आज मैं देख रहा हूं वर्तमान में आज जो तीर्थक्षेत्र कमेटी है, वो जहां साधु-संतों के चरणों में पहुंच रही है, वहीं अपनी समाज से भी अपना संवाद कर रही है। जबतक संवाद नहीं होगा, तब तक तीर्थक्षेत्र कमेटी सम्पन्न नहीं होगी और जब तक वो सम्पन्न नहीं होगी, तब तक हमारे व्यवहारिक तीर्थों की रक्षा कैसे हो सकती है?

आज मुजफ्फरनगर के नई मंडी, कल्पद्रुम महामंडल विधान के कल्पतीर्थ मंडपम से तीर्थ चक्रवर्ती 11 मिल गये और आज 11 मिलने से एक अच्छी शुरूआत हुई है। सबकी भावनायें जुड़ी हैं, निश्चित रूप से मानियेगा कि तीर्थक्षेत्र केटी का 125वां वर्ष जो 22 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाला है, वो एक नया इतिहास बनेगा और जो तीर्थों को लेकर तीर्थों के संरक्षण की उत्कृष्ट भावना, विचार, प्रयास, श्रम, परिश्रम किया जा रहा है, पूरी टीम द्वारा, और विशेष कर इन तीनों के द्वारा, यह निश्चय ही आशीर्वाद के प्राप्त है। देखो तीर्थक्षेत्र कमेटी का संवाद समाज से स्थापित हो रहा है, तो समाज भी सहयोग के लिये तैयार हो रहा है। पहले संवाद नहीं, तो सहयोग नहीं, अब संवाद है, तो सहयोग है। सभी तीर्थ चक्रवर्तियों को मंगलाशीष है और सम्पूर्ण भारतीय समाज से यहीं से आशीर्वाद देते हुये तीर्थक्षेत्र कमेटी के लिये योगदान की अपेक्षा करता हूं। ये समृद्ध रहेंगे, तो तीर्थ समृद्ध रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और आप तीर्थों पर जायेंगे तो आपको वहां धर्म ध्यान करने में प्रतिकूलता नहीं, अनुकूलता प्राप्त होगी।
चैनल महालक्ष्मी की तीर्थक्षेत्र कमेटी के साथ जगह-जगह जाकर हर साधु से आशीर्वाद और समाज से संवाद करने की यह पहल तीर्थों की सुरक्षा व समाज के लिये महत्वूपर्ण पहल है।

इससे पहले चैनल महालक्ष्मी ने धर्मसभा को पिछले दो दशक में तीर्थक्षेत्र कमेटी की उपलब्धियों की जानकारी देते हुये श्री सम्मेदशिखरजी पर पथ, सीढ़ियां, रास्ता, टोंक जीर्णोद्धार, कठपुला निर्माण, 16 कर्मचारियों की नियुक्ति, ऊपर पूजा कमरों का निर्माण, इलैक्ट्रिक असेल्टर आदि की जानकारी दी, जिस पर धर्मसभा में कई ने कहा कि ऐसी जानकारी उन्हें पहले नहीं थी और इन उपलब्धियों का प्रचार होना चाहिये। जब कुछ ने कहा कि वे शिखरजी में लगातार दान देते आ रहे हैं, तब चैनल महालक्ष्मी ने सभी से प्रश्न किया कि आपमें से कितने श्रद्धालु ऊपर पावन पहाड़ के लिये सहयोग राशि देकर आते हैं, तो वह कहां पर? सभी जैसे एक स्वर में बोले, जहां ठहरते हैं, वहीं कोठी या धर्मशाला में। तब उन सबको बताया कि आपने जो भी राशि दी, अच्छी बात है, पर वह उसी धर्मशाला – कोठी तक ही सीमित रह जाती है, उसका एक अंश भी शिखरजी पर्वत में नहीं लगता। इस पर्वत के लिये आप सभी को तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय में ही दान देना होगा या फिर गौतम गणधर व पारसप्रभु टोंक की दिगम्बर जैन तीर्थक्षेक्ष कमेटी की गुल्लक में ही राशि डालनी होगी।

मुजफ्फरनगर में 11 तीर्थ चक्रवर्ती बनने के लिए स्वीकृति देने वाले हैं – अमित जैन (एडवोकेट) ॰ शीतल जैन (सीए) ॰ अनिल जैन (पेपर वाले) ॰ विपिन जैन (नावला) ॰ मुकेश जैन (खतौली) ॰ संदीप जैन (वहलना) ॰ दीपक मित्तल (मेडिकल) ॰ मुकेश जैन ॰ निर्मला जैन ॰ विपिन जैन (गद्दे वाले) ॰ रामपाल अरुणा जैन (बुढ़ाना वाले)।