30 अक्टूबर 2025 / कर्तिक शुक्ल अष्टमी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
24 अक्टूबर को भाई दूज के अवसर पर अहमदाबाद में चातुर्मास कर रहे सबसे बड़े 65 पिच्छी के संघ के नायक आचार्य श्री सुनील सागरजी मुनिराज के सान्निध्य में तीर्थ सुरक्षा कलश प्राप्त करने का सौभाग्य आर्यिका श्री सुस्वर माताजी जी की गृहस्थ समय की बड़ी बहन के परिवार को मिला। इस कलश को प्राप्त करने का सौभाग्य प्रेमिलाबेन, रमेश चन्द्र शाह, जिनेश शाह, कल्पेश शाह, नारोदा परिवार को मिला। सम्मेदशिखरजी की स्वर्णभद्र कूट के रूप का कलश बहुत आकर्षक रूप लेते हुए मानो कह रहा था कि हर तीर्थ इसी तरह चमके, जैसे मैं कलश के रूप में हूं।

इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि इस तरह के तीर्थ सुरक्षा कलश केवल चातुर्मास स्थापना पर ही नहीं, बल्कि हर विधान व पंचकल्यामक के अवसर पर रखे जाने चाहिए। सभी तीर्थों की सुरक्षा के लिये सावधान रहें। आज यहां की चातुर्मास कमेटी ही नहीं, पूरा गुजरात धन्य हो गया कि इस कलश की राशि भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी को तीर्थों के जीर्णोद्धार में लगेगी। हर परिवार में एक को तीर्थक्षेत्र कमेटी का सदस्य बनना चाहिये, वहीं तीर्थक्षेत्र कमेटी का भी दायित्व है कि राशि का उपयोग तीर्थों के जीर्णोद्धार में ही हो, और समाज को इसकी पूरी जानकारी मिलनी चाहिये।
इस बार जहां लगभग 20 जगह वर्षायोग स्थापना के समय तीर्थ सुरक्षा कलश रखे गये, उनमें सबसे ज्यादा राशि 15,15,515 रुपये आचार्य श्री सुनील सागरजी ससंघ के वर्षायोग स्थापना के समय रखे गये कलश से प्राप्त हुई। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी ने तत्काल घोषणा की, कि इस राशि का उपयोग कुंद कुंद आचार्य की जन्म स्थली के लिये किया जाएगा। उस क्षेत्र की जमीन की पूरी खरीद की तैयारी चल रही है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, काम शुरू कर दिया जाएगा।
गुजरात अंचल के अध्यक्ष पारस जैन बज ने कहा कि जिस घर में ऐसा कलश पहुंच जाता है, वहां अमंगल घटना नहीं होती। अकाल मौत भी टल जाती है। चार माह के मंत्रों की अपूर्व महिमा है।
चैनल महालक्ष्मी ने जहां कुंद कुंद आचार्य जन्म स्थली पर वर्तमान में हो रहे खनन से गंभीर खतरों की जानकारी दी, वहीं तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा 9 अंचलों को दी गई लगभग 1.80 करोड़ की राशि की जानकारी देते हुये, साथ ही बनारस की, गिरनार की अनिरुद्ध स्वामी की दूसरी जीर्ण होती टोंक के जीर्णोद्धार के लिये राशि दी है, पर अभी प्रशासन मंजूरी का इंतजार है। साथ ही कहा कि तीर्थ सुरक्षा कलश की शुरूआत आचार्य श्री सुनील सागरजी द्वारा गत वर्ष किशनगढ़ चातुर्मास स्थापना से की थी और तीर्थक्षेत्र कमेटी की भावना है कि रजत शतकोत्तर वर्ष के उपलक्ष्य में 2026 में तीर्थ सुरक्षा कलश 125 जगह वर्षायोग स्थापना में रखे जायें।



















