12 जुलाई 2025 / श्रावण कृष्ण दौज/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
ग्रीन पार्क दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री सौभाग्य सागरजी के सान्निध्य में अष्टाह्निका के अवसर पर सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन हुआ। आचार्य श्री ने इस अवसर पर कहा सिद्धों की आराधना मात्र से सिद्ध मार्ग नहीं मिल सकता, बल्कि उनके बताये गये मार्ग पर चलने से ही उसकी प्राप्ति हो सकती है। जब तक आपको गंतव्य स्थान का मालूम नहीं, तब तक गाड़ी हवाई जहाज की रफ्तार से भी कुछ नहीं हासिल होगा।

उन्होंने कहा कि आज तीर्थों की सुरक्षा, संतों के आहार-विहार के प्रति समाज को अधिक जिम्मेदारी निभाने का समय है। तीर्थों की सुरक्षा के लिये आपको कोई बड़ी राशि का सहयोग नहीं देना, अगर नियमित उतना ही दें, जितना होटल में वेटर को टिप देते हैं। हैरान मत होइये,अगर आज एक करोड़ जैन हैं, तो 60 लाख दिगम्बर समाज से होंगे और उनमें से 5 लाख तो रोज होटल में खाना खाते होंगे और 20 रुपये टिप तो वेटर को ही देते हो यानि रोजाना एक करोड़ और साल में 365 करोड़ की राशि। यानि वेटर जितनी टिप तीर्थों को सुरक्षित कर सकती है। यहां टिप का विरोध नहीं है, बल्कि तीर्थों की सुरक्षा के प्रति सजगता समझनी होगी। आप छोटी-छोटी राशि तीर्थों के लिये निकालते रहे और भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के पास भेजते रहे, जो इस समय 350 के लगभग प्राचीन तीर्थों की सुरक्षा व जीर्णोद्धार के कार्य में 125 सालों से लगी है।

आचार्य श्री उद्बोधन से पूर्व चैनल महालक्ष्मी ने घर-घर गुल्लक योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपके परिवार का हर व्यक्ति एक – एक रुपये रोज तीर्थ सुरक्षा की गुल्लक में डाले और किसी विशेष अवसर पर उस राशि को सीधे तीर्थक्षेत्र कमेटी के खाते में ट्रांसफर कर दे, तो निश्चित ही तीर्थों के जीर्णोद्धार व सुविधाओं में, वह न केवल उपयोगी, बल्कि आपके पुण्य को बढ़ाने में भी सहायक होगी। आज नये जिनालयों के साथ पुराने तीर्थों को संरक्षित करना आवश्यक हो गया है, अपनी प्राचीन संस्कृति को बचाने के लिये, जब हर तरफ से उसको बदलने, अतिक्रमण करने के अवसर ढूंढ रहे हैं, कहीं प्रशासन-सरकार नजर टेढ़ी कर लेती है। हमें जागरूक रहना होगा, सुरक्षा के लिये।













