शास्त्री पार्क : न जैन मंदिर सुरक्षित, न जैन ॰ 200 पुलिस दल के साये में बचा रहा मंदिर

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॰ परमिशन के बावजूद जैन डरे रहे, माइक बंद, गाने-बाजे बंद
॰ मुस्लिम जुलूस बिना परमिशन हजार के साथ, अपशब्द भी
॰ बजरंग दल सहित अनेक संगठन भी मौजूद तब भी…
10 सितम्बर 2025 / आश्विन कृष्ण तृतीया /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

27 अगस्त, दसलक्षण तैयारियां जोरों से हर जिनालय, हर तीर्थ पर चल रही थी, ठीक उसी तरह शास्त्री पार्क, दिल्ली के मंदिर में, पूरी अनुमति लेकर, पुलिस से, फायर ब्रिगेड से, एमसीडी से – उसके बाद लाइटिंग सामने गली में आगे एक द्वार भी, पर तभी 250-300 मीटर दूर मस्जिद से कुछ लोग आये और अनुमति के बावजूद उन लाइटों को जबरन उतरवा दिया। याद आ गये गत वर्ष के दिन, जब लाइटें तोड़ी, पोस्टर फाड़े और पूरी दहशत फैलाई। यही नहीं, इतना दबाव बनाया कि जिनालय के महामंत्री को पकड़ो। कैसी अंधेरगर्दी, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। पीड़ित ही जेल में। इस बार तो हर कदम फूंक-फूंक कर रखा, तब भी 8 बजे जबरन लाइटें उतरवा दी। थानेदार से डीसीपी सब को शिकायत, जवाब मिला, अब रात हो गई अगले दिन बात होगी। फिर अगली सुबह सारी अनुमति देख थानेदार ने पुलिस की उपस्थिति में पुन: लाइटें लगवा दी।

पर फिर तनाव बढ़ने लगा। क्षेत्र के विहिप, बजरंग दल, व्यापारिक संगठनों सहित 20 ने पत्र लिखे। एहतियात के तौर पर ईद-ए-मिलाद के जुलूस को दूसरे रास्ते से निकाले, डीसीपी से आश्वासन भी मिला। जुलूस में 100-150 ही रहेंगे। एक बात और जहां कभी 400-500 जैन परिवार थे, इसी कारण घटते-घटते 50-55 परिवार रह गये। गत वर्ष तक एक साल में 11 परिवार और कम हो गये। इस बार भी 10 पलायन को तैयार हैं।

फिर आ गया 9वां दिन उत्तम आकिंचन का, बाहर नपीरी-तासे बज रहे थे, अंदर शांति विधान चल रहा था। 200 पुलिस बल तैनात था, बजरंग दल आदि भी मंदिर के आसपास मौजूद थे। लगभग प्रात: 9 बजे, पुलिस ने कहा गाजा-बाजा बंद कर दो, अंदर माइक-स्पीकर भी। गजब की दहशत, जैन पर्वों में सब बंद कर दें। ये भारत है या फिर बंग्लादेश या पाकिस्तान। जिस जुलूस को 100-150 लोगों के साथ दूसरे रास्ते से जाना था, वो वहीं से बढ़ा, हजार से ऊपर। यह कैसी पुलिस, मंदिर के आगे फिर अभद्रता, पुलिस के रहते, मंदिर बच गया। मंदिर के एक पदाधिकारी ने यह तक कहा कि यहां के हालात पाकिस्तान-बंग्लादेश की तरह हैं, आज पुलिस के सामने इतना, पर अगर वह न होती, तो मंदिर की र्इंट भी नहीं बचती। परमीशन वाले पिंजरे में और बिना परमीशन वाले बाहर। क्या हो रहा है भरत चक्रवर्ती के भारत में। कोई कार्यवाही नहीं, कोई प्राथमिकी नहीं, जैनों के साथ ऐसी बदसलूकी देश की राजधानी में, तो फिर बाकी देश में कैसा सितम ढाया जाता होगा।