॰ सच है वर्तमान में हैं वर्धमान
॰ 10-12 हजार पुणे की सड़कों पर, हुआ असर
॰ नेता-बिल्डर के साथ मिलकर कुछ ट्रस्टियों का बड़ा घोटाला
27 अक्टूबर 2025 / कर्तिक शुक्ल षष्ठी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
आज अभी मिली जानकारी के अनुसार गोखले लैंडमार्क एलएलपी के पार्टनर विशाल गोखले ने अपने मोबाइल से हैंड ट्रस्ट के ट्रस्टियों को पत्र लिखा है कि जो 230 करोड़ की सेल डीड जो, 8 अक्टूबर को बनी है, उसको रद्द करने की शुरुआत करें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की अभी HND की सेल डीड खत्म हो गई है।अभी आंदोलन जारी रहेगा, जिसमें 29 अक्टूबर को जगह अनशन होगा और आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी द्वारा 1 नवंबर से आमरण की जो घोषणा है, वह सचमुच जैन समाज के लिए नहीं वरन पूरे देश के लिए एक बहुत शर्मसार घटना होगी, अगर उन्हें इस आमरण अनशन को करना पड़ा। इससे पूर्व यह जानकारी है
हां, चैनल महालक्ष्मी ने कहा था कि इस बार जैन समाज कैसे मनायेगा असली दीपावली, क्योंकि उनमें से ही कोई वर्धमान मन्दिर बेच रहा और बाकी उसे बचाने में सफल नहीं हो पा रहे। पर कहते हैं सभी वर्तमान में वर्द्धमान की आवश्यकता है और वर्द्धमान स्वामी कब, किस रूप में आज भी सच में आते हैं, इसका आभास 2552वें वीर निर्वाण महोत्सव से ठीक 20 घंटे पहले वो ऐतिहासिक निर्णय आया, जिससे पूरे जैन समाज ने राहत की सांस ली।

20 अक्टूबर को पुणे जैन बोर्डिंग हाउस मामले में मुंबई स्थित चैरिटी कमीश्नर ने तत्काल सुनवाई की। सभी जानते हैं कि पुणे में जैन बोर्डिंग छात्रावास शिवाजी नगर में स्थित इस छात्रावास का निर्माण हीराचंद नेमचंद दोशी ने 1958 में करवाया था। यह जगह कुछ महीने पहले चर्चा में आई थी, जब उन्हीं के वंशज चकोर (दोषी) कुछ ट्रस्टियों ने इसकी पटकथा दो साल पहले ही शुरू कर दी थी, ऐसा सामने आया है। 20 दिसंबर 2024 को चार अखबारों में विज्ञापन देकर सार्वजनिक निविदायें आमंत्रित की गई थी। गोखले लैंडमार्क्स एलएलपी ने सबसे ऊंची और सबसे उप्युक्त बोली 230 करोड़ की दी। रिवेल्युएशन में पहले इसकी कीमत लगभग 2500 करोड़ आंकी गई थी। चैरिटी कमीश्नर ने 4 अप्रैल 2025 को इस बिक्री की मंजूरी दे दी। सार्वजनिक ट्रस्ट की दान की भूमि बेचने का एक बड़ा षड्यंत्र जिसमें प्राचीन वर्धमान दिगंबर जैन मंदिर भी है, जिसे कागजों में प्रार्थना सभागार बताया। स्पष्ट था कि सच्चाई छिपा कर तीन एकड़ की संपत्ति की बिक्री की गई। कहा गया कि बिल्डिंग का जीर्णोद्धार करना है, उसके लिये फंड नहीं है। जबकि ट्रस्ट की बैलेंसशीट बताती है कि ट्रस्ट का 8-9 करोड़ रुपये अपनी कंपनी में स्थानांतरित किये गये। आरोप लगा कि इस दान भूमि को गैरकानूनी रूप से बेचा गया तथा पुणे के चैरिटी कमीश्नर ने इस जगह की बिक्री को मंजूरी देते समय सभी नियम-कानूनों का उल्लंघन किया। आरोप तो यह भी लगा है कि इस जमीन बिक्री के लेनदेन में शामिल गोखले कंसट्रक्शन कंपनी के सांसद मुरलीधर मोहोल से संबंध हैं, पर सांसद इससे इंकार करते हैं।

इस एचएनडी जैन बोर्डिंग की जमीन की बिक्री के खिलाफ दायर याचिका पर 20 अक्टूबर को अर्जेंट सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट योगेश पांडे ने बेहद मजबूत, कानूनी और साक्ष्य-आधारित पक्ष रखा। साथ ही लक्ष्मीकांत खाबिया, अक्षय जैन और कई अन्य बंधु मौजूद थे। इस सुनवाई में अदालत ने ‘स्टेट्स को’ आदेश जारी किया है, जिसने पूरे समाज का ध्यान खींचा है।
इस तत्काल सुनवाई में धर्मादय आयुक्त अमोघ कलोरी ने मामले में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। इसके चलते जैन समाज के संघर्ष को न्यायिक समर्थन मिल गया है और जमीन की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

इससे पूर्व शुक्रवार 17 अक्टूबर को पुणे के एचएनडी बोर्डिंग से कलेक्टर तक की विशाल रैली आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी के नेतृत्व में बढ़ी, तो उसमें जैन ही नहीं, अन्य धर्मों के लोग भी इस बड़े घोटाले, अन्याय के विरोध में खड़े हो गये थे। कलेक्टर को इस पर तीन पेज का ज्ञापन सौंपा गया। पब्लिक ट्रस्ट की 2500 करोड़ की जगह 230 करोड़ में बेच डाली, जिसमें वर्धमान दि. जैन मंदिर को प्रार्थना सभागार बताकर बेच डाला। चेरिटी कमिश्नर की, प्रशासन की और एक केन्द्रीय मंत्री की शह पर उन्हीं के एक बिल्डर कम्पनी ने यह खरीद-फरोख्त की। इस अवसर पर आयोजित सभा में आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी समाज की अपील के बावजूद तत्काल समय से अन्न का त्याग कर दिया और सरकार प्रशासन व समाज को एक नवम्बर तक इसका निपटारा करने का अल्टीमेटम दे दिया, वर्ना आमरण अनशन की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि यह दिगंबर संत का वचन है और वो कभी पीछे नहीं हटते। इससे पूर्व आचार्य श्री गुणधरनंदी जी, आचार्य श्री सुनील सागरजी सहित अनेक संतों ने कड़े शब्दों में इस खरीद-बेचने का विरोध किया और इस सौदे को तत्काल निरस्त करने की बात कही।

यह बोर्डिंग की जगह केवल एक सम्पत्ति नहीं, गरीब-अनाथों का सहारा, संतों की तपोस्थली, आजादी से पूर्व से धर्म-पूजा का स्थान है, जिसका दुरुपयोग धार्मिक विरासत पर आघात करने जैसा है। इस संघर्ष को अहिंसक तरीके से ही लड़ा जाएगा। यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि जैन धर्म, संस्कृति, विरासत की है और सत्य की विजय के लिये संघर्ष जारी रहेगा।
स्लोगनों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शन में ‘अहिंसा धर्म की जय’, ‘धर्म का धंधा बंद करो’, ‘धर्म कोई वस्तु नहीं, जिसे बेचा या खरीदा जाए’, ‘सेठ हीराचंद नेमचंद जैन दिगंबर बोर्डिंग की जमीन बचाए’, ‘जैन मंदिर बचाओ’, जैसे नारे लगाते हुए दोनों सम्प्रदायों के आक्रोशित जैन समुदाय ने एकजुट होकर जैन बोर्डिंग की जमीन बेचने के फैसले का कड़ा विरोध किया। यह विशाल मार्च कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और ज्ञापन के रूप में अपनी मांगें सौंपी। काली पट्टियां बांधकर और विरोध पत्र लेकर यह जैन बोर्डिंग से जिला कलेक्टर कार्यालय तक एक विशाल मोर्चा निकाला गया। सभी लोगों का इस ओर ध्यान खींचा गया।
केन्द्रीय मंत्री पर आरोप
जैन समाज ने केन्द्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल पर गंभीर आरोप लगाये हैं। जैन बोर्डिंग की जमीन की डील गोखले कन्सट्रक्शन कंपनी के साथ हुई है। मुरलीधर मोहोल के साथ और दो बिल्डर पार्टनर्स इस व्यवहार में शामिल हैं, ऐसा आरोप राजू शेट्टी ने लगाया है। इस बारे में मोहोल ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन, अन्याय नहीं होगा
बोर्डिंग-मंदिर की भूमि बिक्री को लेकर लक्ष्मीकांत खाविया, योगेश पांडे और आनंद कांकरिया ने 16 अक्टूबर को पुणे में ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फर्नाडिस से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी कानूनी पहलुओं को समझा और आश्वासन दिया कि छात्रावास और मंदिर के संबंध में हुए हर समझौते के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और हर संभव सहयोग किया जाएगा।
चकोर गांधी ट्रस्टी का इस्तीफा खेल
एचएनडी के ट्रस्टी चकोर गांधी ने 16 अक्टूबर को इस्तीफे की कापी आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी को दिखाई। 22 सितंबर को इस्तीफा धर्मदाय आयुक्त को ई-मेल किया था। 05 अक्टूबर को उन्होंने स्पीड पोस्ट से इस्तीफा भेज दिया था। 07 अक्टूबर को धर्मदाय आयुक्त ने स्वीकार किया। इसमें एक खास बात 22 सितंबर को मेल, 5 को स्पीडपोस्ट जब इस्तीफा भेज दिया तो 06 अक्टूबर को क्यों ट्रस्टी के रूप में हस्ताक्षर किये। कहीं ये दोतरफा चाल तो नहीं। जैन समाज के लोग यही आशंका जता रहे हैं कि चकोर गांधी दोहरा खेल खेल रहे हैं।
इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3511 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : धोखेबाजी से पूर्वजों की दान दी गई सम्पत्ति को, पब्लिक ट्रस्ट को निजी बताकर, मंदिर को प्रार्थना सभागार बताकर बेचने वाले बिल्डरों व नेताओं की मिलीभगत जैनों के लाखों वोट से जीतने वाले विधायक के बैंक द्वारा गिरवी, उसे तुरंत गिरवा कर 70 करोड़ देने वाली कई अनियमितताओं का कानूनन खुलासा होना चाहिए, वहीं एक दिगंबर आचार्य द्वारा एक समयसीमा में सुब कुछ ठीक न करने पर आमरण अनशन का अल्टीमेटम भी जैन समाज के लिये गंभीर प्रश्न है। पुणे की यह गलत कदम पर उठाई जा रही रोक ही आने वाले समय में जैन संस्कृतियो ंको बिकने से रोक में एक दीवार बन सकेगी।



















