17 अक्टूबर 2025 / कर्तिक कृष्ण एकादशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
कोलकाता के ऐतिहासिक बेलगछिया दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री प्रमुख सागरजी मुनिराज का 25वां रजत संयम दिवस तीर्थ सुरक्षा को समर्पित रहा और इस अवसर पर भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के पूर्वांचल का आचार्यश्री के सान्निध्य में सफल अधिवेशन भी हुआ।

इस अवसर पर आचार्य श्री प्रमुख सागरजी के आह्वान पर कोलकाता दिगंबर जैन समाज ने शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी में बनने वाले मल्टीपरपज भवन का एक तल बनवाने की सहर्ष संस्तुति दी। आचार्य श्री प्रमुख सागरजी ने कहा कि आज का पवित्र-पावन दिन, दीक्षा दिवस तो बहाना है, हकीकत में तीर्थों का उद्धार करना है। टेंट लगाने, आने, खाने-पीने से दीक्षा दिवस का कुछ लेना-देना नहीं, तीर्थों के उद्धार के संकल्प के बिना यह दीक्षा दिवस नहीं। बद्रीनाथ यात्रा में जैसे कोलकाता श्रेष्ठियों ने ऊपर द्वार बनाने का संकल्प लिया, वहां कमेटी ने तीर्थ पर दातारों के नाम लिखकर शाश्वत कर दिया।
नवनिर्मित हो रहे मुनिसुव्रतनाथ मंदिर की ओर संकेत करते हुए कहा कि एक तीर्थ बनाने में इतनी मेहनत कते हो, पसीना बहाते हो, लेकिन भारत के जितने तीर्थ हैं, जहां से सिद्धत्व का मार्ग मिलता है, वहां निर्माण से पुण्य कई गुना मिलता है।

ध्यान रखना, अगर तुमने अपने गुरु के नाम पर एक तीर्थ का उद्धार किया, तो जब तक वो तीर्थ रहेगा, तब तक तुम्हारे गुरु का नाम रहेगा। मुझे नाम की चाह नहीं है, लेकिन तुम्हारे मन में तीर्थों का उद्धार रहे। आज देश के सारे तीर्थों को सम्हालने वाले आपके बीच में हैं। आज चार बातें कहना चाहूंगा –
पहला वसीयत – पूर्वजों ने जो तीर्थ हमें सौंपे, उसे तीर्थक्षेत्र कमेटी सम्हाल रही है।
दूसरा अहमियत – पूरे जैन समाज ने दानवीर कर्मठ जम्बू प्रसाद जी को कमेटी के अध्यक्ष के लिये निर्विरोध चुना।
तीसरा खासियत – कद छोटा, पद पड़ा। इनके पूर्व, तीर्थक्षेत्र कमेटी बंटवारे से निबट गई। इन्होंने कहा न बंटवारा, न तेरह-बीस। छोटे-बड़े का भेद खत्म कर दिया।
चौथी नसीहत – आपको तीर्थों का राजा बनाया, अब उन तीर्थों पर यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं हो, कर्मचारी दुर्व्यवहार न करें।
उन्होंने कहा कि अब तीर्थ-मंदिरों के साथ शिक्षा मंदिर और चिकित्सा मंदिरों का भी जीर्णोद्धार करना है, वहां पर अच्छे गुरुकुलों को बनाये, जहां लोग अपने बच्चों को पढ़ने भेजें। आज बच्चे लंदन-अमरीका पढ़ने जाते हैं, वहीं के होकर रह जाते हैं। धर्म-परिवार को भूल जाते हैं।

हर मंदिर में तीर्थों की सुरक्षा के लिये एक-एक गुल्लक भी हो। तीर्थरक्षा के लिये दान शाश्वत दान है, उससे तीर्थ, साधु, धर्म, संस्कृति, विरासतें भी सुरक्षित रहेंगी। 125 सालों से तीर्थक्षेत्र कमेटी हमारे तीर्थों को संभाल रही है। आज हम – आप बड़े आराम से दर्शन करते हैं। पर जब वहां झगड़ा होता है, कब्जा होता है, केस की तारीख पड़ती है, तो कमेटी की हालत ऊपर-नीचे हो जाती है। सलाह के लिये तो केवल जीव्हा हिलानी पड़ती है, पर सहयोग के लिये कदम साथ बढ़ाना होता है।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन मजबूत करना होगा। तीर्थों को बचाना होगा, संतवाद-पंथवाद को खत्म कर, एक होना होगा, वर्ना न हमारी संस्कृति बचेगी, न धर्म। हमें अपने नाम में जैन लिखना होगा, अपनी पहचान बनानी होगी। अपने कर्तव्य को समझिये। आप लोग शिखरजी की वंदना करने जाते हैं और दान की राशि उसी कोठी-धर्मशाला में रसीद कटवा कर कहते हैं, शिखरजी पहाड़ के लिये दान देकर आया हूं। वह दान उन्हीं दीवारों में रह जाता है। वहां दान दीजिए, पर जब शिखरजी तीर्थ पहाड़ के लिये दान दें, तो तीर्थक्षेत्र कमेटी को दीजिए, सभी सिद्ध, कल्याणक, अतिशय तीर्थों पर संवर्धन-संरक्षण तीर्थक्षेत्र कमेटी करती है। आप लोग भी तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़िये। जैन धर्म का आप भी जन-जन में प्रसार करिए।

125 स्थापना वर्ष कमेटी के चेयरमैन श्री जवाहर लाल जैन जी ने कहा कि कोलकाता ने तीर्थों के लिये बड़ी सेवा की है। तीर्थक्षेत्र कमेटी की स्थापना महासभा से 22 अक्टूबर 1902 को मथुरा के अधिवेशन में तीर्थों के संरक्षण के लिये अलग से हुई। माणिक चंद जी सहित 50 संस्थापक सदस्य थे। 125 वर्षों से यह निर्विवाद खड़ी है। तीर्थक्षेत्र कमेटी का प्रारूप जितना बड़ा होना चाहिये था, उतना बड़ा नहीं हुआ। 125वें वर्ष महोत्सव की शुरूआत मथुरा से 22 अक्टूबर 2026 को और समापन 22 अक्टूबर 2027 को शिखरजी यानि आपके क्षेत्र में ही होगा, जिसकी जिम्मेदारी आप सबको लेनी है। आज हर महिला तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़े, आपका एक-एक रुपया, एक-एक मिनट तीर्थक्षेत्र कमेटी को मजबूत करेगा। नौ हजार सदस्यों की संख्या को एक लाख पहुंचाना है। हर मंदिर में तीर्थक्षेत्र कमेटी की गुल्लक रखी जाये।

महासभा के महामंत्री श्री राज कुमार सेठी ने कहा कि 1884 में महासभा की स्थापना हुई और 10 सालों मे आवश्यकता महसूस हुई कि तीर्थों के लिये अलग कमेटी की स्थापना हो। मक्सी पार्श्वनाथ, गिरनार, शिखरजी, केसरिया जी आदि के विवाद होते हुए हमें तीर्थों के सुरक्षित दर्शन करा रही है। इससे सारे साधु जुड़े हुए हैं। तीर्थों के जीर्णोद्धार, बदलाव को रोकने के लिए एक ही बात है कि तन-मन-धन से तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़िए।

बिहार तीर्थक्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री श्री पराग जैन जी ने मिथिलापुरी तीर्थ की जानकारी दी।
आचार्य श्री वर्धमान सागरजी संघ के संघपति श्री राकेश जैन जी ने हर घर को तीर्थक्षेत्र कमेटी से जोड़ने की अपील की।

ईटखोरी तीर्थ के मंत्री श्री सुरेश जैन झांझरी ने 10वें तीर्थंकर श्री शीतलनाथ जी की जन्मभूमि पर आगामी 26 से 30 नवम्बर तक होने वाले पंचकल्याणक की जानकारी दी।

तीर्थक्षेत्र कमेटी ने शिखरजी के लिये केस लड़ने के अलावा किया क्या है? ऐसे सवालों का जवाब देते हुए चैनल महालक्ष्मी ने पावर पाइंट प्रेजेंटेशन द्वारा शिखरजी के कार्यों की पिछले 30 वर्षों की उपलब्धियां बताई – जिनमें सड़क निर्माण, शेड निर्माण, इलैक्ट्रिक असेस्टर, टोंकों का पुनर्निर्माण, कठपुला का स्थायी निर्माण, भाता घर, पारस टोंक पर कमरे, दीपदान, कर्मचारियों की पहाड़ पर नियमित व्यवस्था, पारस टोंक के झुकाव को रोकना आदि बताये। इनकी पूरी जानकारी आगामी अंक में दी जाएगी।
इस अवसर पर तीर्थों के चित्रों के आगे तीर्थ सुरक्षा संकल्प ज्योति प्रज्ज्वलित कर अर्घ्य चढ़ाये गये। अनेक लोगों ने संकल्प पत्र भरकर तीर्थक्षेत्र कमेटी के सहयोग का संकल्प लिया।



















