तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा देहरादून में महिला सम्मेलन सम्पन्न : हर तीर्थ पर अतिशय होता है, बस प्रचार-प्रसार-विज्ञापन की जरूरत है – आचार्य श्री सौरभ सागर

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मत कहना कभी शिखरजी तीथ के लिये दिया दान – क्यों कहा अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन ने ?
25 सितम्बर 2025 / आश्विन शुक्ल तृतीया /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

‘आज हमारे दुश्मन अजैन नहीं, जैन ही हैं। पंथवाद का जहर घुल गया है। आज के दिन एक तरफ तीर्थों के आंसू पोंछने, दूसरी तरफ दिव्यांगों के आंसू पोंछने की चर्चा है। मतलब आंसू पोंछने से है। कैसा अद्भुत संयोग है कि तीर्थक्षेत्र कमेटी की स्थापना 124 वर्ष पूर्व जंबू स्वामी जी की मोक्ष स्थली पर हुई और उसके 125 वर्ष मनाने की कमान अब जंबू प्रसाद जी के हाथ में है।’ यह अवसर था देहरादून में शनिवार 20 सितंबर को जब भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी (उत्तरप्रदेश एवं उत्तरांचल) एवं सौरभ सागर सेवा संस्थान के संयुक्त अधिवेशन का, जिसमें धर्मसभा थी आचार्य श्री सौरभ सागरजी की, जिन्होंने इन शब्दों के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की।

तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा नारी शक्ति का आह्वान करते हुये महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया था। आचार्य श्री ने कहा कि जंबू जी ने कई बातें इस मंच से उठाई, जिसमें मठ, पंथ और जैन गिनती प्रमुख हैं। मेरा यह कहना कि साधु अपने तीर्थ पर दूसरे को आने से रोकें, तो आप समझ लो वह मठ है, पर जो संतों ने तीर्थ बनाये और दूसरे संतों को नहीं रोकते हैं, वो मठ नहीं, तीर्थ है। आज ऐसे अनेक तीर्थ हैं।
पंथवाद पर उन्होंने कहा कि आज बीसपंथ के मंदिरों में झंझट नहीं है, दूसरे पंथ में ऐसा हो सकता है। जब पास होने वालों की गिनती होती है, तो 33 फीसदी और 98 फीसदी वाले, दोनों की पास की श्रेणी में आते हैं।

महिला सम्मेलन और नारी शक्ति की तीर्थ संरक्षण में उपयोगिता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि नारियों के पास शक्ति की कमी नहीं है, महिलायें जितनी प्रशंसा की पात्र हैं, उतना पुरुष महिलाओं की उपस्थिति स्वीकार नहीं करते, मंदिरों-तीर्थों पर भी महिलाओं की उपस्थिति ज्यादा रहती है। पर आज उन्होंने धर्म की ओर पीठ कर ली है। सोशल मीडिया का बहुत असर दिख रहा है। आज घूंघट भी नहीं, लज्जा भी खत्म हो रही है। सदाचार की जगह अनाचार हो रहा है। आज तो पूरे कपड़े पहनने तक को नहीं कह सकते। आज तो फैशन भी मर्यादाओं पर कुठाराघात कर रहा है। नारियों को समानाधिकार से परिस्थिति गंभीर तो नहीं हो रही?

आज तीर्थ आंसू बहा रहे हैं कि बीते कल में क्या थे, आज क्या हो रहा है? अपने चेहरे को चमकाने के लिये एक बार में 5 हजार खर्च कर देते हो, यहां तीर्थों के लिये साल में 11 हजार नहीं दान कर सकते? दे सकते हैं, पर देना नहीं चाहते। तीर्थक्षेत्र कमेटी को विज्ञापन-प्रचार करना होगा, हर तीर्थ पर अतिशय होता है, पर जब उसका प्रचार-प्रसार होता है, तो यात्रियों का आवागमन स्वत: बढ़ जाता है।

इससे पूर्व अध्यक्षीय उद्बोधन में तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जंबू प्रसाद जैन जी ने कहा कि 124 वर्ष पूरे करने वाली तीर्थक्षेत्र कमेटी, सभी संस्थाओं की अपेक्षा बिना विवाद के, बिना विघटन के निर्विकार चलने वाली एकमात्र संस्था है। दिन पर दिन, हमारी संस्कृति, समाज, धर्म का ह्रास हो रहा है। जैसी आज स्थिति है, उसे देख लगता है कि 60-70 साल बाद जैन ही नहीं बचेगा। अगर तीर्थ बचे, तो समाज बचेगा, संस्कृति बचेगी, धर्म बचेगा।

उन्होंने कहा कि आज अनेक विचारणीय बिंदु हैं। अनेक साधु मठ बना रहे हैं। पंथवाद से, संतवाद से बंटते जा रहे हैं। 40 करोड़ थे, अब 45 लाख की सरकारी जैन गिनती में रह गयी है, वो भी एक नहीं, अनेकों में बंट गये हैं। इधर नये निर्माण, भव्य पंचकल्याणक हो रहे हैं, उधर गांवों के मंदिर अनाथ हो रहे हैं, अन्य मतालम्बियों द्वारा बदले जा रहे हैं। पदों का अहंकार भी समाज को विघटित कर रहा है। यदि जैन धर्म को बचाना है, तो आने वाली जनगणना में धर्म में जैन लिखना है। अपने नाम के बाद ‘जैन’ लिखना होगा, फिर बाद में कुछ भी। उन्होंने कुछ बड़ी बात सीधे शब्दों में भी कह दी कि जो अपने नाम में जैन नहीं लिखता, वह जैन कहलाने का हक नहीं रखता। इसी तरह शिखरजी आप सब जाते हैं और आकर कहते हैं कि हम शिखरजी तीर्थ के लिये दान देकर आये, पर सच यह है कि शिखरजी तीर्थ के लिये कोई दान नहीं देता। आप सब जिस धर्मशाला, कोठी में ठहरते हैं, वहीं दान देते हैं, गलत नहीं है, पर वो राशि उस कोठी-धर्मशाला में ही रह जाती है, शिखरजी तीर्थ के लिये नहीं होती। आज से इतना तो प्रण कीजिए कि अब जब भी शिखरजी पर्वतराज के लिये दान देना होगा, तो तीर्थक्षेत्र कमेटी को ही देंगे।

उत्तर प्रदेश- उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जवाहरलाल जैन जी ने तीर्थक्षेत्र कमेटी की जानकारी देते हुए कहा कि 1902 में मथुरा चौरासी में इसकी स्थापना हुई और 124 सालों से निर्विवाद रूप से काम कर रही है। चल-अचल दोनों प्रकार के तीर्थों की सुरक्षा-संवर्धन करके हमअपनी संस्कृति की सुरक्षा कर सकते हैं। 125वें वर्ष में पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम रखे गये हैं, तीर्थक्षेत्र कमेटी को घर-घर पहुंचाना है। आज तीर्थक्षेत्र कमेटी का कार्य दिखाई नहीं देता। 14 तीर्थों पर बड़े केस लड़ रही है,आज तभी उनके दर्शन कर पा रहे हैं। आज संकल्प लेकर जायें कि हर छोटा-बड़ा जैन भाई-बहन तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़ेगा।

प्रख्यात विद्वान डॉ. नलिन के. शास्त्री जी ने कहा कि आज तीर्थों का अभिनंदन, वंदन का दिन है। विरासतों की सुरक्षा का दिन है। तीर्थक्षेत्र कमेटी ही एक ऐसी संस्था है, जो तीर्थों के सुख-दुख में सदा खड़ी रही है। मातृत्व शक्ति का आह्वान विरासतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए है। एक मां के कहने पर बेटा गोम्मटेश को खड़ा कर सकते हैं, तो क्या, आज की मां-बेटी तीर्थों की सुरक्षा में योगदान नहीं कर सकतीं, जरूर कर सकती हैं।

उत्तराखंड जैन समाज के अध्यक्ष सुखमाल चंद जैन जी ने तीर्थों के दस्तावेजों तथा बाऊण्ड्री वॉल बनाने पर जोर दिया तथा तीर्थक्षेत्र कमेटी का पूरा सहयोग करने की अपील की।
जैन मिलन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नरेश चंद जैन ने कहा कि वर्तमान में तीर्थों पर कहीं न कहीं संकट के बादल छाये हैं। नारी संस्कारों की पहली पाठशाला है, प्रत्येक को जोड़ सकती है। तीर्थ सुरक्षित रहेंगे, तभी जैन धर्म-संस्कृति सुरक्षित रहेगी।

देहरादून महिला अध्यक्ष कल्पना जैन ने कहा कि देहरादून का महिला संभाग तीर्थक्षेत्र कमेटी का पूरा साथ देगा, छोटी राशि के साथ सदस्यता के लिए घर-घर अभियान चलायेंगे।

मीनू जैन गाजियाबाद ने देव भूमि के साथ नारी योगदान पर प्रकाश डालते हुए नारी शक्ति से तीर्थों की सुरक्षा में सहयोग की अपील की।

डॉ. कल्पना जैन (नोएडा) ने महिलाओं की तरह तीर्थक्षेत्र कमेटी से युवाओं को भी तन-धन से जोड़ने का सुझाव दिया तथा महिलाओं से घर के उत्सवों पर तीर्थों के लिए दानराशि की अपील की।

अपराजिता जैन (दिल्ली) ने ब्राह्मी-सुंदरी से लेकर आज तक महिलाओं के योगदान को सराहा तथा तीर्थों की सुरक्षा के लिये तीर्थक्षेत्र कमेटी के हाथ मजबूत करने की बात कही।

वीना जैन (देहरादून) ने कहा कि तीर्थों का संरक्षण केवल तीर्थक्षेत्र कमेटी का कार्य नहीं, हर दिगंबर जैन का है। तीर्थक्षेत्र कमेटी ने आज आत्म चिंतन का अवसर दिया है, चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करना है।

सुनील जैन (देहरादून) ने कहा कि तीर्थक्षेत्रों के साथ हमारे गांव के मंदिर कब बदल जायें, पता नहीं चलता, इधर लोग अन्यत्र जाते हैं, उधर मंदिर बदल जाते हैं। ऐसे मंदिरों की सूची बने, जिससे उन्हें पुनर्स्थापित किया जा सके।

वंदना जैन (देहरादून) ने कहा कि समाज में पंथवाद समाप्त करना होगा। यदि महिलायें ठान लें और आगे खड़ी हो जायें, तो कोई तीर्थों की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकेगा। तीर्थक्षेत्रों की अंदर की व्यवस्थायें महिलायें बाखूबी देख सकती हैं।

चैनल महालक्ष्मी ने इस अवसर पर कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी क्या कर रही है, यह सवाल तो हम तुरंत पूछ लेते हैं, पर तीर्थक्षेत्र कमेटी या तीर्थों की सुरक्षा के लिये हम क्या कर रहे हैं, तो बंगले झांकने लगते हैं। साल में दस बार घूमने जाते हैं, तो दो-चार बार तीर्थों पर भी जाइये। जितना संवरने-मेकअप में खर्च करते हैं, उसका दसवां हिस्सा तीर्थों की सुरक्षा के लिये दे दें, तो बहुत कार्य हो जाये। आपके द्वारा दिया गया दान, तीर्थक्षेत्र कमेटी तीर्थों के जीर्णोद्धार में लगायेगी। केसों में हो रहे करोड़ों के खर्च के लिये अलग व्यवस्था करेगी।

संदीप जैन ‘सजल’ तथा सन्देश जैन बिलासपुर एवं मीनू जैन गाजियाबाद ने बखूबी मंच संचालन किया।

स्वागत भाषण में श्री सन्देश जैन बिलासपुर महामंत्री ने आचार्य श्री को नमन करते हुए तीर्थों के संरक्षण, संवर्द्धन के प्रति भारतवर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी की प्रतिबद्धता के विषय में प्रकाश डाला तथा जीवन आशा हास्पिटल की तरफ से सभी का संयुक्त अधिवेशन में स्वागत सम्बोधन किया।