॰ आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी की त्वरित पहल के बाद विधायक यू-टर्न
॰ विधायक व साध्वियों की उपस्थिति में मंदिर के बैनर फाड़े, ताले लगाये
॰ विधायक धमकी – ‘जहां रहते हो, वहीं गाड़ दूंगा’, बाद में मांगी माफी
॰ जैन भवनों को धर्म प्रभावना व संत निवास की जगह कमाई का धंधा करने वालों का हो पर्दाफाश
10 दिसंबर 2025 / पौष कृष्ण षष्ठी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
08 दिसंबर को एक बार फिर दिल्ली के सबसे अनोखे जैन स्थल के राजिन्दर नगर जैन मंदिर, जिसकी स्थापना, लगभग 36 साल पहले आचार्य श्री सुशील मुनि जी की प्रेरणा से हुई, उसे मिटाने की लगभग एक माह में दूसरी बार कोशिश की गई।

शंकर रोड, राजेंद्र नगर पर स्थित सुशील आश्रम में पहले ही उसको धार्मिक-संत भवन से लाइब्रेरी-इंस्टीट्यूट में बदल कर कमाई की मशीन बना दिया गया, अब ललचाई नजर वहां स्थित जैन मंदिर पर गढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार अपनी साजिश के चलते गौतम ओसवाल ने साध्वी दीप्ति व साध्वी लक्षिता जी को साथ लेकर शकूरबस्ती के विधायक और भाजपा दिल्ली प्रदेश मंदिर प्रकोष्ठ के अध्यक्ष करनैल सिंह को ऐसा कुपाठ पढ़ाया कि मंदिर पर अराजकतत्व कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें वहां से हटवाओ। फिर विधायक जी पहुंच गये एक हिंदू साधु व कुछ के साथ मंदिर में। शालीनता और धमकी स्टाइल दोनों में अपनी बात कहने लगे।

कमेटी के सदस्य अरुण जैन से यह कहना, जहां तू रहता है, वहीं गाड़ दूंगा, धक्के मारकर बाहर करवा दूंगा, तू जानता नहीं मैं करनैल सिंह यहां का विधायक हूं, भाजपा मंदिर प्रकोष्ठ अध्यक्ष हूं, मंदिर की व सभी कमरों की चाबी दें और फिर अपने ताले ठोक दिये, उससे पहले मंदिर में लगे सब बैनर फड़वा दिये। साध्वी दीप्तिजी ने शनिवार को अदालत के निर्णय को मानो तोड़-मरोड़ कर बताकर भाजपा विधायक को शायद भड़काया और जब उनसे सही स्थिति के लिये कहा तो ना-नुकुर करने लगी। ताले लगने के बाद सूचना चैनल महालक्ष्मी के पास भी पहुंची, टीम पहुंची जैन मंदिर। गेट पर बाउंसर, पर इस बार उन्होंने जबरन रोका नहीं, पर नाम और मोबाइल नंबर जरूर नोट करने के बाद एंट्री दी। मंदिर में पिछले माह की तरह भक्तामर व णमोकार मंत्र पाठ शुरु किया गया, रातभर जारी रहा और भाजपा विधायक का विरोध करने का, राजनीतिज्ञों का धर्मस्थल को बंद करने के खिलाफ जुलूस निकालने के लिये तैयारी शुरू हुई ।

इस बीच महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजराज गंगवालजी ने पूरी जानकारी राजा बाजार में आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी को दी, जिन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राजनीतिक क्षेत्रों में इस बात को पहुंचाया। चैनल महालक्ष्मी ने अरुण जैन व पंकज जैन आदि कमेटी सदस्यों से चर्चा की और अगली सुबह 8 बजे समिति लोगों के साथ जुलूस का निर्णय हुआ।

08 दिसंबर की रात में ही विधायक करनैल सिंह पर दबाव पड़ गया, उन्हें अपनी गलती का अहसास भी हो गया। कारण भी था, इस घटना पर पूरे जैन समाज से अपील करने पर 15 से 20 हजार जैन समुदाय वहां पहुंच जाता। चैनल महालक्ष्मी ने जब उनसे ऐसे अपशब्दं के कारण के बारे में पूछा, तो क्षमा मांगते कहा कि मुझे तो एक तरफ के लोगों ने विक्टिम बना दिया। जैन लोगों को ही अराजक तत्व बता कर मुझे भ्रमित किया गया।

09 दिसंबर को जहां मंदिर में भक्तामर पाठ जारी रहा, बाहर भाजपा विधायक व गौतम ओसवाल के विरोध में तथा सुशील मुनि जी के उत्तम प्रयास व जैन एकता जिंदाबाद के नारों से एक बारगी तो उत्सुकतावश देखने वालों के कारण मुख्य मार्ग भी जाम हो गया।

फिर यहां से चैनल महालक्ष्मी पहुंची आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी के पास, वहां गजराज गंगवालजी तथा मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सहित 3 सदस्य भी आये। भाजपा विधायक करनैल सिंह ने वहां सबसे माफी मांगी और बंद कमरे में पूरी चर्चा हुई। उन्हें पूरा इतिहास बताया कि मूलकचंद जी तक सब सही चलता रहा। पर बाद में इस स्थान को पैसे कमाने की मशीन में धीरे-धीरे सब बदला गया और अब उसी कड़ी में मंदिर पर भी ताले लगाकर हटाने का जैसे कुत्सित षड्यंत्र चल रहा है।

आचार्य श्री के चरणों में माफी मांगकर विधायक महोदय ने कहा कि मुझे गलत जानकारी पहले कुछ लोगों ने बताई। मैंने साध्वी जी को भी यहां आकर सब समस्या खत्म करने के लिये कहा, तो वो नकार गई। मैं तो अराजकतत्वों से मंदिर बचाने आया था, अब पता चला कि यहां तो उल्टी बात हुई। उन्हीं के शब्दों में – मैं आप सबको आश्वासन देता हूं कि मंदिर वहीं था, वही हैं, वहीं रहेगा। इस पर कोई आंच नहीं आने दूंगा और इसको बचाने के लिये सदा आगे खड़ा रहूंगा। उनकी बातों से स्पष्ट लग रहा था कि बीते दिन की उनकी हरकत व जैन समाज द्वारा हजारों के विरोध की संभावनायें, तथा आचार्य श्री द्वारा ऊपर तक बात पहुंचाने का पूरा दबाव उन पर था। पर कहते हैं अंत भला, सो सब भला।
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इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के ऐपिसोड नं. 3363 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : एक बार फिर जैन मदिर को बंद कराने के लिये घर के ही लोग जयचंद बनकर राजनीतिक ताकतों को लगाने में सामने आये। जैनों की एकता के प्रतीक मंदिर को ही बंद करने के अलावा जैनों में ही भीतरीघात की चालें चली जा रही हैं। पहले ही सुशील आश्रम के बड़े हिस्से को इंस्टीट्यूट, लाइब्रेरी बनाकर पैसे बटोरने की मशीन बना दिया है। जैन समाज के कार्यक्रमों के स्थान के साथ संतों के ठहरने वाले भवन कमरों को भी बदल दिया। कैसी गंदी हरकतें कर रहे आज कमेटी के कुछ लोग, त्यागियों के साथ मिलकर। 30 साल से ज्यादा समय से चल रहे जैन एकता के इस अनोखे मंदिर को भी आज पैसे बनाने की मशीन बनाने की, कमर्शियल करने की कोशिश में लगे हैं, क्या ऐसे लोगों को कमेटियों में रहने का कोई हक होना चाहिए? जहां गेट पर कुछ प्रबंध कमेटी सदस्यों के प्रवेश पर पाबंदी का नोटिस लगा है, उनकी बजाय ऐसे लोगों को प्रवेश बंद कर सही सीख देनी चाहिए।














