आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी ससंघ के पीछे मौत, बस बच गई जान ॰ पुलिस वैन नहीं होती, तो बड़े ट्रक ने कई को रौंद दिया होता

0
988

॰ अहिल्याबाई नगर से आगे बड़े, पुलिस सुरक्षा के कारण बचे

19 दिसंबर 2025 / पौष कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
‘आज हम पुलिस की वेन के कारण से मरते-मरते बच गये, बड़ी दुर्घटना से बच गये। एक तरफ का रोड खराब था, वैसे हम रोड पर वाहन के सामने आने की दिशा में ही चलते हैं, हमारे आगे दो झण्डे वाले थे, फिर हमारा संघ और पीछे अहिल्या नगर के 20-25 श्रावक थे, उसके पीछे पुलिस की वैन थी, जो हार्न बजाती ट्रेफिक को कंट्रोल करती चल रही थी, उसके पीछे एक और गाड़ी थी हल्की स्पीड में। तभी पूरी रफ्तार से बड़ा ट्रक आया, ड्राइवर शायद नशे में था कि वो उसी गाड़ी से भिड़ा, भिड़ते ही वो गाड़ी एक तरफ घूम गई और ट्रक वाले का स्टीयरिंग घूम करके डिवाइडर से टकराकर दूसरे रोड पर चला गया, बस गाड़ी पलटी नहीं और फिर हम रुके, तब पुलिस वाले ने हमसे कहा कि आप आगे चलें, हम यहां देखते हैं। फिर उन्होंने ट्रक ड्राइवर को ट्रक से निकाला, शायद उसके पैर कट गये थे और ट्रक में आग लगने वाली थी। एम्बुलेंस को फोन किया, शायद प्राण बच गये।

यह अभी नौ बजे की घटना है जबकि पुलिस गाड़ी 6 बजे आ गई थी, उनकी वैन खड़ी रही। सर्दी के कारण और छोटे-छोटे साधु संघ में होने के कारण और ज्यादा चलना नहीं था, बस साढ़े सात किमी, इसलिए 7 बजे निकले। आज पुलिस वैन और श्रावक साथ थे, इसलिये बाल-बाल बच गये, अगर वो न होते, तो बड़ा ट्रक कितनों को रौंद देता।’ यह एक श्रावक के नम्बर पर वहीं घटनास्थल से आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी से जानकारी मिली चैनल महालक्ष्मी को।

11 दिसम्बर को अहिल्या नगर से धर्मतीर्थ की ओर बढ़ते, इस दुर्घटना के चित्र देखकर होश उड़ जाये। इतना बड़ा ट्रक, दोनों गाड़ी न होने पर कितनों को रौंद गया होता, इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। केवल पुलिस सुरक्षा के कारण वो हादसा होने से बच गया। पिछले कुछ समय में जैन संतों से विशेषकर दो माह में इतनी दुर्घटनायें होने के बावजूद हम नहीं सुधर रहे। सरकार द्वारा व्यवस्था प्रदान करवाने के बावजूद हम उसका उपयोग करने के प्रयास नहीं करते।
यह जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3565 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : अपनी चल अनमोल सम्पत्ति के प्रति आज जैन समाज अपने कर्तव्य के प्रति गंभीर नहीं हो रहा है। नवम्बर से फरवरी तक के समय धुंध भी एक कारण बनता है, दूसरा नशे में ड्राइविंग और तसीरा बड़ा कारण, जानबूझकर टक्कर और यह सबसे खतरनाक है। साथ ही बायं तरफ चलना नहीं, सामने से आ रहे वाहन की दिशा में – इसका ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। तीसरी बात – निकट के थाने को सूचित कर, पुलिस सुरक्षा लेना, चौथा महत्वपूर्ण कर्तव्य है, विहार में हम लोगों का साथ चलना। अगर इन बातों का ही ध्यान रख लें, तो दुर्घटनाओं को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।