अमित शाह ने पहली बार एक घंटे सुनी गंभीरता से जैन समस्या : धर्मस्थल छीन लो : षड्यंत्र पर्दाफाश

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॰ सनातन संत नियोग की 3 बड़ी बात
॰ धर्मस्थल षड्यंत्र में कौन, जानिये पूरा सच
॰ विदेशी शक्तियों के फंड की भी आशंका
19 सितम्बर 2025 / आश्विन कृष्ण त्रयोदशी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

कर्नाटक का धर्मस्थल, 800 वर्ष प्राचीन, 18वीं पीढ़ी में, जिसने आज 55 लाख लोगों तक पहुंच बना ली है। सवा लाख करोड़ रुपये का ऋण चुकाया है। क्षेत्र के लाभ के लिए 1030 झीलों की खुदाई कर उनका पुनर्निर्माण कराया है। गत एक दशक में 400 से अधिक प्राचीन जिनालयों व 12 हजार के लगभग मंदिरों के जीर्णोंद्धार के लिए 175 करोड़ रुपये प्रदान किये हैं। 20 हजार छात्रों को हर महीने छात्रवृत्ति दी जा रही है। स्कूलों को 72 हजार डेस्क दिये हैं। इसी साल गांव के स्कूलों में पढ़ाई को सुगम बनाने के लिए 1030 शिक्षकों की भर्ती की गई है। रूडसेट के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया और रोजगार दिया। ऐसे पवित्र, सेवामय, करुणामय धर्मस्थल के धर्माधिकारी डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े व उनके परिवार को बलात्कारी, हत्यारा कहने में, उस तीर्थमय क्षेत्र को हड़पने का जो षड्यंत्र रचा गया, शायद इससे बड़ी साजिश, कुचक्र इस सदी में कोई और नहीं रचा गया होगा।

आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने ली अगुवाई
इस बारे में जहां मीडिया या साजिशकर्ता उसका मजा लेते रहे, सनसनी फैलाते रहे, पर अगुवाई फिर की आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने। उन्हीं के आशीर्वाद और निर्देशन से स्वस्तिश्री धर्मसेन भट्टारक के साथ एक विशेष समूह का गृहमंत्री अमित शाहजी से निवेदन करने के लिये गठन किया गया। गृहमंत्री से भेंट कर स्पष्ट किया कि हिंदू और जैन धर्म के विरुद्ध बढ़ती खतरनाक गतिविधियों पर शीघ्र रोक लगाई जाए। साथ यह भी आग्रह किया गया कि धर्म विरोधी कुचक्रों को पूरी तरह समाप्त करने के लिये ठोस कानून बनाये जायें और दोषियों को सख्त सजा मिले।

यह भी सच है कि इस धर्मस्थल षड्यंत्र पर सबसे पहले प्रखर आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ही थे। उनसे चैनल महालक्ष्मी की इस संदर्भ में कई बार चर्चा हुई। उन्होंने हर बार कहा कि एसआईटी की जांच में पूरे षड्यंत्र बेनकाब हो जाएगा। उन्होंने समाज को अन्याय और षड्यंत्र के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की प्रेरणा दी।

अमित शाह ने दिल जीता
चैनल महालक्ष्मी से चर्चा में उन्होंने गृहमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमित शाह जी ने हमारा दिल जीत लिया। पूरे एक घंटे हमारी बात सुनी, सहमति जताई और एक विशेष सम्पर्क नम्बर देते हुये कहा कि आचार्य श्री गुणधरनंजी जी को निवेदन करना कि रात 12 बजे भी कोई समस्या सामने आये, तो कॉल करे, मैं तत्काल उसी समय कार्यवाही करने के आदेश दूंगा।

सनातन संत नियोग की 3 बात, बने कानून
आचार्य श्री ने बताया कि ‘सनातन संत नियोग’ के रूप में 3 महत्वपूर्ण बातें रखी गई:-
पहली संतों पर लगातार हमले हो रहे हैं, कुछ जगह तो हत्या भी की गई। ऐसे केसों के लिये एससी/ एसटी कानून की तरह एक अधिनियम बनाया जाये।
दूसरा, तीर्थों और मंदिरों पर तोड़फोड़ व अतिक्रमण हो रहे हैं। यह दीवारों पर नहीं, जैन – हिंदू संस्कृति पर सीधा हमला है।
तीसरा, यहां की सोशल मीडिया पर संतों के प्रति फैलाई जा रही दुर्भावना पर कड़ी कार्यवाही की जाये।
इसके लिये दो पृष्ठीय निवेदन भी दिया गया।

क्या है पूरा षड्यंत्र – धर्मस्थल कब्जाने का!
दो माह पहले एक नकाबपोश बोरे में एक इंसानी खोपड़ी लेकर पहुंचता है और दावा करता है कि 1995 से 2014 तक धर्मस्थल में सफाई का काम करता था। इस दौरान उस पर दबाव बनाकर 300-400 लाशों को दफनाने का काम भी सौंपा गया, जिनमें अधिकांश लड़कियां-महिलाओं के शव थे, उनमें से कई तो इस तरह अर्धनग्न क्षत-विक्षिप्त थे कि उनसे यौन शोषण से इंकार नहीं कर सकते। 2014 में एक बेटी का इसी तरह के शव को देखकर वह वहां से भाग खड़ा हुआ। अब उसके मन ने झकझोर दिया, इसलिये 11 साल बाद उसका खुलासा करने आया है। सनसनी पैदा हो गई। अदालत ने एक आईटी का गठन कर दिया। 16 स्थान बतायें, पूरी खुदाई हुई। इस बीच एक महिला आई कि मेरी युवा बेटी धर्मस्थल से लापता हो गई। आशंका है कि यौन शोषण के बाद उसकी हत्या कर दी गई और उसने अपन को उस नकाबपोश की पहली पत्नी बताया।

पर गहरी खुदाई में कहीं से कोई प्रमाण नहीं मिला। इतने में महिला भी अपने पहले बयान से पलट गई और बोली – मेरी कोई बेटी लापता नहीं हुई, और तो और, कोई बेटी ही नहीं है।
नकाबपोश की गिरफ्तारी हुई। उसने तीन नाम बताये, जिनके कहने पर यह सब मनगढ़ंत कहानी रचकर यह झूठा सनसनीखेज षड्यंत्र रचा। अभी जांच जारी है। लगता है कि ये सब छोटी मछलियां हैं, असली तो इनके ऊपर कोई और है।

कौन है षड्यंत्र के पीछे?
आचार्य श्री ने चैनल महालक्ष्मी से चर्चा करते हुए आशंका जताई कि वामपंथी शक्तियां, मिशनरियां विदेशी फंड के साथ इसके पीछे सोची-समझी साजिश शायद रच रही थी। कारण था कि यह धर्मस्थल लोगों के जीवन को उठा रहा, रोजगार देकर उनके धर्मपरिवर्तन के प्रयासों को लगातार निष्फल कर रहा था।

क्या, सरकार कर सकती है धर्मस्थल पर कब्जा?
हां, हर उस मंदिर पर कब्जा किया जा सकता है, जिस पर वित्तीय अनियमितताओं और असमाजिक गतिविधियों के व्यापक आरोप लगे, तो सरकार उन्हें कब्जे में ले सकती है। यही कारण है कि धर्मस्थल पर झूठे आरोप लगाये गये कि वह सूदखोरी और श्रद्धालुओं के धन के दुरुपयोग में संलिप्त रहा है और ये झूठे आरोप लगाये गये कि यहां सैकड़ों हत्यायें, बलात्कार हुए हैं।
इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3443 व 3469 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : धर्मस्थल व हेगड़े परिवार के प्रति रचा गया यह षड्यंत्र किसी एक या दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि सोची समझी बड़ी चाल है, इस क्षेत्र को हड़पने और ऊंचाई की ओर बढ़ रहे डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े जी की छवि को खराब करने की। जैन संस्कृति, तीर्थ, विरासत के बाद अब यह नये तरह का षड्यंत्र सामने आया है। जैनों को एक होकर, अपने को सुरक्षित रखना होगा।