चांदखेड़ी तीर्थ अध्यक्ष गिरफ्तार, फिर जमानत ॰ इस गिरफ्तारी ने तोड़ दी जैन समाज की कमर, उड़ा दी न्याय की धज्जियां

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॰ कुछ के दबाव में अनीतिगत गिरफ्तारी, बिना तथ्यों को देखें शर्मनाक कार्यवाही
॰ प्रतिष्ठित व्यक्ति पर कालिख पोतने की कोशिश
17 नवंबर 2025 / मंगसिर कृष्ण त्रयोदशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

‘मालिक ही चोर है’। चांदखेड़ी अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने वर्तमान में मानो न्याय की धज्जियां ही उड़ा दी हैं। जिस व्यक्ति ने अपना जीवन धर्म और समाज को समर्पित किया, उसे ही प्रशासन-पुलिस ने ‘चोर’ बताकर कटघरे में खड़ा कर दिया। यह अतिअल्पसंख्यक जैन समाज पर किया गया सीधा और अक्षम्य आघात है। लगता है कि आज जैनों के प्रति षड्यंत्र केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक दुर्भावना के गहरे स्तर तक फैला हुआ है, कोई गहरी सोची-समझी साजिश के अंतर्गत हुआ यह पुलिसिया कुकृत्य स्पष्ट करता है कि जैसे जैन मंदिरों का प्रबंधन और अति अल्पसंख्यक जैन समाज के धार्मिक अधिकारों की छीनने की एक इबारत लिखी जा रही है।

तीर्थंकर श्री आदिनाथ जी का एक प्रमुख अतिशय तीर्थ चांदखेड़ी, जिसका नूतनीकरण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी के परम आशीर्वाद से किया गया है, जहां अत्याधुनिक सुविधाओं ने यात्रियों को आकर्षित किया है, वहीं आज अतिशय नहीं, चर्चा में कुछ अलग कारण से आ गया।

पांच नवंबर को सायं 7.12 बजे झालावाड़ के खानपुर थान में एक प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसने न केवल जैन, बल्कि पूरे धार्मिक समाज को चौंका दिया। प्राथमिकी (जिसकी प्रतिलिपि चैनल महालक्ष्मी के पास भी है), उसके अनुसार जैन मंदिर परिसर चांदखेड़ी में हनुमानजी, गणेशजी, नंदी जी व शिव परिवार की प्राचीन मूर्तियां हटाकर फिंकवाने की बात लिखी गई। लक्ष्मी नारायण ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी के अध्यक्ष हुकुम चंद जैन, समिति व कर्मचारियों द्वारा उपरोक्त मूर्तियां चोरी कर अन्य स्थान पर ले जाया गया है, जो 5 हजार वर्ष पहले स्थापित की थी। जिसको षड्यंत्रपूर्वक कूट रचित तरीके से खुर्द बुर्द किया गया। इन्हें पुन: स्थापित करें, वर्ना अगले दिन सुबह 8 बजे जैन मंदिर परिसर में उग्र रूप से आंदोलन किया जाएगा और किसी प्रकार की अव्यवस्था होने पर पुलिस की जिम्मेदारी होगी। इस प्राथमिकी को 33 लोगों ने दर्ज कराया और हैरानगी है कि इसमे एक जैन बंधु अमन जैन पुत्र सुभाष जैन भी थे।

आनन-फानन बैगेर किसी जांच, तथ्य के तुरंत प्रथामिकी दर्ज कर लेना बहुत हैरानगी का विषय रहा। जहां जैन तीर्थों पर अतिक्रमण, बदलाव, तोड़फोड़ की शिकायतों को लम्बे समय तक दर्ज नहीं किया जता, यहां दर्ज करने में मिनट नहीं लगा। इस प्राथमिकी में कई बातें चिंतनीय लिखी गई, जबकि हकीकत बिल्कुल अलग थी –
1. मूर्तियां हटवाकर फिंकवाना – वास्तव मे उन प्रतिमाओं को सहमति से वीडियो रिकार्डिंग में नियत स्थान पर पूरे आदर से रखवाया गया।

2. मूर्तियां चोरी कराई गई – हकीकत में अध्यक्ष हुकुम चंद काका ने उस समुदाय के प्रमुख रामबाबू से बाकायदा एक लिखित अनुबंध किया था (लगभग पूरे समाज की सहमति थी) कि इन प्रतिमाओं का आप लोग नियमित पूजा पाठ आराम से कर सकें, इसीलिये आपको उचित 25 गुना 50 फीट जगह व मंदिर निर्माण के लिये 21 लाख रुपये दे रहा है। प्रतिमाओं को बाकायदा मुहुर्त निकालकर दोपहर डेढ़ बजे वीडियो रिकार्डिंग में स्थानांतरित किया गया। (चैनल महालक्ष्मी के पास वीडियो है)। उस पर चोरी का आरोप कहकर प्राथमिकी दर्ज करना संकेत करता है कि जैनों के प्रति कितनी जल्दबाजी बिना तथ्यों के एकतरफा जांच की गई।

3. षड्यंत्र पूवर्क कूटरचित तरीका – स्पष्ट रूप से कागज नोटोराइज कराके प्रतिमाओं को पूर्ण सम्मान देने के आश्रय से भावनी माता का जबूतरना श्याम कालोनी खानपुर में स्थापित की गई। स्पष्ट था कि मूर्तियों को स्थानांतरित में न चोरी की गई, न कोई षड्यंत्र कूट रचित बात थी।
अगले दिन परिसर में कुछ लोगों ने विरोध जताया और अगले दिन 06 नवंबर को हाजा में मुख्य अभियुक्त बताते हुए रामबाबू व पांच अन्य को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर 10 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में ले लिया।

फिर इसी क्रम में 12 नवंबर को चांदखेड़ी तीर्थ के अध्यक्ष हुकुम चंद काका को गिरफ्तार कर पूरे जैन समाज को शोचनीय स्थिति में डाल दिया। हैरानगी तो यह है कि सही तथ्यों की जानकारी लिये बिना यह सब किया गया। इसी प्रकरण में किशनगढ़ में तैनात डीसीपी अंशु जैन (पुलिस उप अधीक्षक) का भी स्थानांतरण तुरंत कर दिया।

कोटा निवासी प्रतिष्ठित हुकुम चंद काका की गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि हुकुम चंद जैन मूर्ति चोरी प्रकरण में वांछित थे, इसलिये उन्हें आज (12 नवंबर) को गिरफ्तार किया गया है और इस गिरफ्तारी को इस मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कुछ अन्य समाज के लोगों के प्रदर्शन व दबाव में ऐसा पुलिस का कदम निश्चय ही अल्पसंख्यक समाज के प्रति अन्याय को इंगित करता है।

दो दिन बाद शुक्रवार 16 नवंबर को झालावाड़ न्यायालय में सेशन न्यायाधीश ने उदय पक्ष के तर्कों पर गंभीरता पूर्वक मनन करते हुए केस डायरी का अवलोकन किया। केस डायरी के अवलोकन से प्रकट है कि मूर्तियों को जैन मंदिर परिसर चांदखेड़ी से हटाकर भवानी माता का चबूतरा, श्याम कालोनी, खानपुर में स्थापित की गई है। इस कृत्य से प्रथम दृष्टया प्रार्थी अभियुक्त का आशय मूर्ति चोरी करने का रहा हो, ऐसा प्रकट नहीं होता है। साथ ही जैन मंदिर परिसर चांदखेड़ी से मूर्तियां हटाए जाने वाले अन्य सह अभियुक्तगण के साथ प्रार्थी अभियुक्त की सहमति होना तथा उसकी योजनाबद्ध षड्यंत्र में लिप्त होना, अब तक के अनुसंधान से स्पष्ट नहीं है।

प्रार्थी अभियुक्त से कोई अनुसंधान या बरामदगी शेष होना नहीं बतलाया गया है, अत: प्रकरण के गुणावगुण पर कोई टिप्पणी किये बिना प्रकरण के तथ्यों परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रार्थी अभियुक्त (हुकुम चंदकाका) को जमानत का लाभ दिया जाना न्याय उचित प्रतीत होती है,के आधार पर सेशन जज ने चांदखेड़ी जैन मंदिर अध्यक्ष की जमानत मंजूर कर ली।
इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3538 व 3542 में देखी जा सकती है।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन: आज अति अल्पसंख्यक समाज के प्रति किस तरह दुर्व्यवहार व त्वरित बिना जांच के कदम उठाये जा रहे हैं, उसका जीवंत उदाहरण यह चांदखेड़ी का प्रकरण है। राजनीतिक चुनाव में एक – दूसरे की टांग खींचने की चालों में इस बात को तूल दिया गया, जिसमें जैन समाज ने दूसरे धर्म को पूरा सम्मान देते उनकी प्रतिमाओं को समुचित आदर व सम्मान देते हुए, न केवल जगह दी, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए 21 लाख दिये। पूरी बात को अनुबंध बनाकर नोटोराइज कराया, सही मुहूर्त देखकर वीडियो रिकार्डिंग में स्थानांतरित किया, पर मिला क्या – दाग, चोरी, षड्यंत्र, असम्मान व जेल।