॰ जनगणना के समय धर्म के कॉलम में केवल ‘जैन’ ही लिखना
17 फरवरी 2026 / फाल्गुन कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

‘आज हमारे विमुख होने के कारण तीर्थ यत्र-तत्र बिखरे दिखाई पड़ रहे हैं, भगवान ने बताया जो स्वयं तीर्थ को करने वाले हैं, वो ही तो तीर्थंकर होते हैं। भगवान ने बताया इन तीर्थों की भी रक्षा करो। आप सब भी तीर्थों की रक्षा के लिये हमेशा अपना योगदान करके कर्तव्य का बखूबी पालन करें। प्रतिवर्ष कुछ न कुछ आपका योगदान तीर्थों के लिये होना ही चाहिये,’ यह कहते हुये आचार्य श्री विमर्श सागरजी ने बड़ौत के आदिनाथ धर्म तीर्थ प्रवर्तन पर्व – जिनागम पंथ दिवस (13 फरवरी) खचाखच भरे सभागार में तीर्थ सुरक्षा की आवश्यकता आज के समय को देखते हुए जन-जन तक कही।

वहां उपस्थित भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, शतकोत्तर रजत वर्ष के चेयरमैन जवाहरलाल जैन और चैनल महालक्ष्मी द्वारा तीर्थ सुरक्षा में तथा विवादों को सुलझाने की बढ़-चढ़ कर पहल की बातों पर संकेत करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि ‘‘जैसे आप अपने बच्चों के लिए, जब तक वे योग्य नहीं हो जाते, उनके लिये उचित प्रबंधन करते रहते हैं, उसी प्रकार तीर्थ प्रबंधन के लिए भी आपका योगदान होना चाहिए। मेरा आप सभी को, तीर्थक्षेत्र कमेटी को पूरा आशीर्वाद है।’’
तीर्थक्षेत्र कमेटी अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन ने कहा कि आज हमारे प्राचीन तीर्थों की हालत कैसी है, यह किसी से छिपी नहीं है, पर हम नहीं जागते। जैसे अपने घरों की रक्षा करते हैं, वैसे अपने तीर्थों की रक्षा नहीं करते। आजकल तो तीर्थयात्रा भी पिकनिक की तरह होती है। आज जैसे हर कार्य के लिये अर्थ की आवश्यकता होती है, वैसे ही तीर्थों के लिए भी। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके पैसे का उपयोग केवल तीर्थों के जीर्णोद्धार पर ही लगेगा। तीर्थ बचेंगे, तो संस्कृति बचेगी। संस्कृति बचेगी, तो संस्कार बचेंगे। हम और आपकी पहचान बचेगी।
जनगणना पर स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म के कॉलम में केवल ‘जैन’ ही लिखना है।
पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3627 में देख सकते हैं।



















