संभाजी नगर देश का पहला नगर, जहां हर मंदिर में रखी जाएगी तीर्थक्षेत्र कमेटी की गुल्लक

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तीर्थ हमारी शान है, हमारे प्राण हैं, आज उनके लिये जरूरी है दान – आचार्य श्री गुणधरनंदी
31 जनवरी 2026 / माघ शुक्ल चतुर्दशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

छत्रपति संभाजी नगर में सप्त दिवसीय योग साधना अमृत महामहोत्सव में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा तीर्थक्षेत्र संरक्षण, संवर्धन, जीर्णोद्धार हेतु संतों के परम सान्निध्य में 11 जनवरी 2026 को सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागरजी, राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुणधर नंदी, क्रांतिकारी राष्ट्रसंत श्री गुप्तिनंदी जी, आचार्य श्री प्रणाम सागरजी, उपाध्याय श्री विरंजन सागरजी, गणिनी आर्यिका श्री सौभाग्यमति माताजी आदि को गरिमामय उपस्थिति रही।

गणधराचार्य श्री कुंथुसागरजी ने कहा तीर्थक्षेत्र, सिद्धक्षेत्र, अतिशय क्षेत्रों की सुरक्षा कौन करे, कैसे करे? नेता कौन हो, संचालक कौन? तीर्थों की सुरक्षा की बातें सुनते जीवन बीत गया, पर हल आज तक नहीं निकला। देखते-देखते बहुत से क्षेत्र हाथ से निकल गये। अधिकांश सिद्धक्षेत्रों पर हमारा अधिकार ही नहीं है। किसी का अधिकार हो जाये, तो वापस मिलना मुश्किल हो जाता है। आज दिगंबर जैन समाज, साधुओं में, पंथों में बंट गया। जहां फूट रहती है, वहां नुकसान ही होता है, स्टेजों से बहुत उपदेश हो गये। आज न साधु, न समाज इस पर गंभीर है। एक-एक साधु एक-एक क्षेत्र ले लें, तो तीर्थक्षेत्र कमेटी को सहयोग मांगने की जरूरत न पड़े। आज परिवार कोर्ट – कचहरी -बीमारियों पर लाखों खर्च कर रहे हैं, थोड़ा भाव बनाइये, तीर्थक्षेत्र कमेटी को मजबूत बनायें। भावना सब रखते हैं, पर सहयोग नहीं करते।

आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने कहा कि हम जैन हैं, तो उसका कोई सर्टिफिकेट है, तो ये सिद्धक्षेत्र हैं, उनके बिना हमारी पहचान खत्म हो जायेगी। हमारी पहचान हैं तीर्थक्षेत्र, उनकी सुरक्षा में प्राण न्यौछावर भी करें, तो कम है। जिन्होंने तीर्थों पर कुदृष्टि डाली, वे बच नहीं पाये। तीर्थ हमारी शान है, हमारे प्राण हैं। जैन समाज ने जब भी किसी अन्य समाज पर संकट आया, तो उनकी सहायता की। आज तुमसे जान नहीं, तुम्हारा दान मांग रहा हूं। अगर करोड़ों का काम करना चाहते हो, तो तिजोरी के साथ, एक तीर्थों की गुल्लक भी लगायें। कल भाजपा महासचिव बी एल संतोष ने बताया कि सबसे ज्यादा टैक्स जैन देते हैं, तो तीर्थों के लिए दान क्यों नहीं, उसमें भी रियायत मिलती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि तीर्थों का जीर्णोद्धार होना चाहिए, बदलाव नहीं, प्राचीन संस्कृति का विनाश न हो। आज वास्तु के नाम पर आलतू-फालतू बदलाव हो रहे, हजार साल पुरानी मूर्तियां, मंदिर तोड़ रहे, वो साधु नहीं, आतंकवादी हैं। जो संस्कृति का विनाश करते हैं, औरंगजेब हैं, वो जैनों के विनाश के लिए कलकी पैदा हुआ है। पहले श्रीफल देकर प्रार्थना करें, न माने तो कानूनन ट्रीटमेंट करें, संविधान कहता है, 1947 से पुरानी संस्कृति, मूर्तियों से छेड़छाड़ न हो।

आचार्यश्री गुप्तिनंदी जी ने कहा कि अपने हाथों से दान निकालना शुरू हो जाये, वो जीवंत यज्ञ है, तीर्थों की रक्षा, संस्कृति का परिचायक है। धरा से निकलती मूर्तियां, हमारी प्राचीनता को दर्शाती हैं। हमारे तीर्थों का संवर्धन, संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। आज आपको दक्षिणा देने का वक्त है, पुराने प्राचीन तीर्थों की सुरक्षा हो। रोजाना 1, 11, 21 रुपये तीर्थों के लिये दान करो। तीर्थों की रक्षा आपने की, तो तीर्थ भी आपकी रक्षा करेंगे, यह जीवंत रूप में सेलिब्रेशन होगा। उन्होंने सभी को संकल्प दिलाया कि रोज तीर्थक्षेत्र कमेटी के लिये दान निकालेंगे।

आचार्य श्री प्रणाम सागरजी ने कहा कि तीर्थों का जीर्णोद्धार है, तभी समय का उद्धार है। आज तीर्थों की बात चल तीर्थों के साथ हो रही है। मैं इन्हें गुल्लक नहीं, गुडलक कहता हूं, यहीं से तुम्हारा गुडलक शुरू होने वाला है। आज छुट्टी का दिन है, और कर्मों की छुट्टी करने के लिये, रोज कुछ राशि की तीर्थों के सहयोग के लिये जेब से छुट्टी करो।

उपाध्याय श्री विरंजन सागरजी ने कहा कि प्राचीन तीर्थों का संवर्धन, संरक्षण तीर्थक्षेत्र कमेटी अकेले नहीं कर सकती, इसमें हर व्यक्ति का दायित्व होना चाहिए। जैसे आप अपने परिवार के हर सदस्य का संरक्षण करते हैं, वैसे ही तीर्थों का संरक्षण करना भी आपका कर्तव्य है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जिनको देखने वाला कोई नहीं। तमिलनाडू, कर्नाटक, केरल के ऐसे कई तीर्थ हैं। संकल्प लें, जा नहीं सकते, तो 5 से 10 फीसदी राशि तीर्थों की रक्षा के लिये निकाले। सहस्त्रकूट की प्रतिमा के लिये हजारों रुपये, हजारों हाथ उठ जाते हैं, पर प्राचीन तीर्थों के लिए 5 हजार भी नहीं, कहेंगे परिवार से बात करूंगा। संकल्प लें, हर साल प्राचीन तीर्थों के लिये 5 हजार रुपये दान दूंगा।

गणिनी आर्यिका श्री सौभाग्यमति माताजी ने कहा कि जितना पुण्य 100 नये मंदिर बनवाने में मिलता है, उतना ही एक प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार में। आज तीर्थों के साथ, संतों की भी रक्षा हो। नये तीर्थों पर थोड़ा-सा लगाम लगायें, प्राचीन तीर्थों का जीर्णोद्धार 5-5 समृद्धशाली साधुओं को सौंप दें।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी ने कहा कि मेरा ध्येय है कि चल-अचल तीर्थों की रक्षा-संवर्धन के लिये सबका सहयोग हो, संगठित होकर जैन ध्वाजा को नई ऊंचाई तक फहरा सकें। संगठित हों, संगठन मजबूत हो। सरकार हमारी नहीं सुनती, क्योंकि हम भी आज गूंगे-बहरे हो गये हैं। तीर्थों की सुरक्षा के लिये सबको सहयोग करना होगा।

शतकोत्तर रजत महोत्सव समिति के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन जी ने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी 125 वर्षों से सेवा कर रही है। बगैर साधुओं के आशीर्वाद के इसे नहीं चला पायेंगे।

संभाजी नगर जैन पंचायत के अध्यक्ष महावीर पाटनी जी ने कहा कि निश्चित रूप से तीर्थों की रक्षा समाज की जिम्मेदारी है। तीर्थक्षेत्र कमेटी तीर्थों की कस्टोडियन बने, मालिक नहीं। उन्होंने मंच से घोषणा की कि संभाजी नगर व आसपास के सभी 23 मंदिरों में गुल्लक रखी जाएगी। तीर्थों की वंदना नहीं कर सकते, तो उसमें रोज 2, 5 रुपये डालो। इन तीर्थों की सुरक्षा, रक्षा समाज की जिम्मेदारी है। तीर्थक्षेत्र कमेटी के कोषाध्यक्ष अशोक दोषी ने स्पष्ट कहा कि बिना धन के कमेटी कुछ नहीं कर सकती।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के उपाध्यक्ष संजय पापड़ीवालजी ने कहा कि अब हम 125 साल की ओर हैं और 9000 सदस्य हैं। सदस्यों की संख्या को बढ़ाना होगा, हर परिवार को सहयोग करना होगा।
महाराष्ट्र अंचल के अध्यक्ष मिहिर गांधी जी ने कहा कि हमारा प्रयास महाराष्ट्र के हर मंदिर में तीर्थरक्षा गुल्लक रखने का होगा।

चैनल महालक्ष्मी ने कहा कि आज समय आ गया है कि जब हर साधु का आशीर्वाद तीर्थक्षेत्र कमेटी को मिले तथा चातुर्मास स्थापना, पंचकल्याणक व बड़े महोत्सवों में एक तीर्थरक्षा सहयोग हेतु कलश रखा जाये, जिसकी राशि तीर्थक्षेत्र कमेटी तीर्थों के जीर्णोद्धार में लगाये।

अपराजिता जैन ने मंगलचारण से कार्यक्रम की शुरूआत की। अनुराग जैन द्वारा बखूबी मंच संचालन किया गया और कहा कि तीर्थों पर चक्रवर्ती विवाह करायें।