बचा लो सिद्धवर कूट ॰ एक सिद्धक्षेत्र को मिटाने की सरकारी कोशिशें तेज ॰ हिंदू भाई जाग गये, पर जैन सो रहे हैं…

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17 जनवरी 2026 / माघ कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
मध्यप्रदेश के खरगौन जिला की कुबड़वाह तहसील के मोदरी गांव के बारे में सरकारी कदम पर जैन समाज मानो अभी तक सोया हुआ है। यहां 699 हेक्टेयर वन भूमि में सरकार की नजर यहां के फॉसफोराइट खनिज पर है, उसके लिये प्रशासन द्वारा महोदसी क्षेत्र के इस 700 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फास्पोराइट खनन के लिये गुरुग्राम की कमोडिटी हब कम्पनी को ठेका दिया है और वन मंडल बड़वाह खनिज उत्खनन के पूरे जंगल से पेड़ काटने की तैयारी है। पर इसमें जैन-हिंदू भाइयों का क्या मतलब? है, बहुत बड़ा मतलब है और इस पर हिंदू समाज तो जाग गया, पर जैन आज भी सो रहा है।

खरगौन के बड़वाह क्षेत्र का वन मंडल आम जंगल नहीं है, इसमें जहां हिंदू समाज के लिये च्यवनप्राश के जनक च्यवनऋषि की तपस्थली, ऋषि कश्यप का कोठवा आश्रम और जैनों का सिद्धक्षेत्र सिद्धवर कूट है। हिंदू संतों ने म.प्र. हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है, उनके अधिवक्ता अभिष्ट मित्र ने इंदौर खण्डपीठ में याचिका दायर की और इसको लेकर आनंदेश्वर मंदिर परिसर में सारे तथ्यों के साथ प्रेसवार्ता भी आयोजित की गई, जिससे सान्ध्य महालक्ष्मी को जानकारी मिली, जिसमें याचिकाकर्ता ने क्षेत्रवासियों से इस आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया है।

हां, इस बारे में लक्ष्मीनगर, दिल्ली के सलेकचंद जैन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रतिवेदन जरूर दिया, इसे मध्यप्रदेश सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को उचित कार्यवाही के साथ रिपोर्ट देने को कहा है।
इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3587 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन:
जहां हिंदू समाज अपने धार्मिक क्षेत्र के लिये गंभीर दिखता है और हर दरवाजा खटखटाने के साथ दबाव भी बना रहा है, वहीं जैन समाज के मानो कान पर जूं नहीं रेंगती, जबकि एक सिद्धक्षेत्र सिद्धवर कूट पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। सरकार का भी कर्तव्य होना चाहिये कि अपनी जेब गरम करने के लिये तीर्थों को नष्ट करने के अपने कदमों से दूर रहे।