रावण परिजन द्वारा स्थापित प्रतिमा की श्री राम -लक्ष्मण ने की थी पूजा

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11 लाख वर्ष प्राचीन पैठन प्रतिमा पर हजारों ने किया अभिषेक
22 दिसंबर 2025 / पौष शुक्ल दौज /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

संभाजी नगर से 55 किमी कुंथलगिरि से 150 किमी, एलोरा से 80 किमी की दूरी पर स्थित अतिशय तीर्थ पैठन में शनि अमावास को हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी के सान्निध्य में महामस्तकाभिषेक किया।

श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, पैठन में विराजमान 20वें तीर्थंकर की प्रतिमा प्रतिनारायण रावण के बहनोई खरदूषण राजा द्वारा 11 लाख 86 हजार 550 साल पहले यही से बहने वाली गोदावरी नदी की बालू (रेत) से निर्माण कराया था। खरदूषण का नित्य देव-दर्शन का नियम था। जब वे यहां आये, तो उन्होंने अपने नियम दर्शन के लिए नदी किनारे की बालू (रेत) से तत्कालीन शासन के सम्राट से तीर्थंकर बने मुनिसुव्रतनाथ भगवान की अत्यंत सुंदर प्रतिमा बनवाई और दर्शन पूजा कर उसका विसर्जन कर आगे बढ़ गये।

फिर यह प्रतिमा नदी में अनेकों प्रवाह के बावजूद अब तक यथावत रही। बाद में वनवास के समय जब सीताजी की खोज कर रहे थे, तब श्रीराम जी व लक्ष्मण यहां आये, तब उन्होंने भक्तिभाव से तीर्थंकर की महापूजा की थी। तब से आज तक अनेक अतिशय यहां लोगों ने देखे हैं।

इस तीर्थ के भूगर्भ में श्याम वर्ण की पदमासन ध्यानस्थ मुद्रा में मुनिसुव्रत तीर्थंकर की प्रतिमा पर शनि अमावस पर हजारों लोग महामस्तकाभिषेक के लिये जुड़ते हैं, अब आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी के सान्निध्य में यह सौभाग्य श्रद्धालुओं ने पाया। कभी आप भी दर्शन करने आये, अभिषेक भी करें, पुर्ण्याजन करें।

पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3574 में देख सकते हैं।