प्राचीन जैन मंदिर की सम्पत्ति पर कब्जे ॰ नकली कागजात बनवाकर बनाया दावा ॰ कागजात अपडेट रखो, सुरक्षित रखो

0
828

19 दिसंबर 2025 / पौष कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
राजस्थान के गंगापुर सिटी के घी वाली गली में स्थित और मंदिर देव स्थान विभाग, राजस्थान (जयपुर) में रजिस्टर्ड दिगंबर जैन मदिर के गलत रूप से शपथ दिलवाकर 04 मई 2022 को दुकान पर पट्टा अपने नाम करा लिया।

हैरानगी है यह सब मिलीभगत से हो रहा है, मंदिर की दो दुकानें सरकारी कागजों में 1963 से भी पहले से पंजीकृत हैं। साथ ही दो दुकानें बनी हैं, नीचे की दुकान 17 मई 1963 से प्रकाश चंद पल्लीवाल को दे रखी है और तब से मंदिर को किराया दे रहा है। ऊपर की मंजिल पर कर्मचारी निवास करता है। और ये सब टामा सर्वे की रिपोर्ट में सफा पृष्ठ 38 पर क्रम संख्या 1394 पर जैन मंदिर के नाम दर्ज है और बरसों से बिजली मंदिर से ही सप्लाई होती है। अब पृथक बिजली कनेक्शन देने के लिये आवेदन दिया गया। बिजली विभाग से कर्मचारी, मीटर लगाने आये, तो कथित दावेदार रमेश ने दुकान पर दावा करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया। उसने नगर परिषद से पट्टा प्राप्त करने के कागज दिखा दिये। जब बिजली कर्मचारी लौटे, पता करने पर मंदिर अध्यक्ष को बताया कि दुकान तो उसके नाम है। मंदिर कमेटी हैरान हुई।


अध्यक्ष प्रवीन जैन ने पूरी जानकारी ली तो पता चला कि रमेश ने गलत रूप से दुकान अपनी बताकर झूठा शपथ पत्र दिया और दो गवाहों के हस्ताक्षर कराकर फर्जी पट्टा प्राप्त कर लिया, जो निश्चित ही प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जैन समाज की अचल सम्पत्ति पर फर्जीवाड़ा कर पट्टा जारी करना, न केवल अपराध है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा भी है। कमेटी ने तुरंत मूल कागज दिखाकर, सही न करने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी, तब फर्जीवाड़े पर कार्यवाही हुई। कानूनी कार्यवाही से बचने के लिये तब रमेश ने अपनी अर्जी देकर पट्टा वापस कर दिया। इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3558 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : पूरे कागजात के बावजूद फर्जी कागजात बनवाकर दावा करने का यह जीता-जागता नमूना है। आज मंदिर कमेटियों के पास पूरे कागज नहीं होते, कई बार तो जाने वाली कमेटी, नई कमेटी को पूरे कागज नहीं सौंपते। प्रशासन की मिलीभगत भी इससे उजागर होती है। ऐसे में हर मंदिर को अपनी सम्पत्तियां, प्रशासन में उचित जगह पंजीकृत कराना और अपडेट रखने की आवश्यकता को प्रदर्शित करता है।