26 दिसंबर 2025 / पौष शुक्ल षष्ठी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी
मथुरा। मंगलवार 16 दिसंबर को मथुरा के दिगंबर जैन संघ में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष के अंतर्गत होने वाले विभिन्न आयोजनों पर चर्चा हुई, जिनमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लेकर पूरे एक वर्ष होने वाले कार्यक्रमों को रेखांकित किया गया।
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तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी की अध्यक्षता व प्रदीप जैन पीएनसी के आतिथ्य में लगभग सभी ने अपने सुझाव दिये।
तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी ने सबका आभार प्रकट करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि हम तभी सुरक्षित रहेंगे, जब तक हमारे तीर्थ सुरक्षित रहेंगे। नये का निर्माण हो, पर साथ ही प्राचीन का संरक्षण भी हो। सभी को अपने-अपने स्तर पर कार्यों के प्रति गंभीर होना होगा। इस वर्ष में हमें हर को जोड़ने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत भी करना होगा।
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उपाध्यक्ष प्रदीप जैन जी पीएनसी ने सबसे पहले सुझाव दिया कि तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125 वर्षों में जितने अध्यक्ष बने, उनमें से अधिकांश हमारे बीच नहीं है, उन सभी के परिवारों को इस अवसर पर सम्मानित करना चाहिए। उन सबने तीर्थों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

125 वर्षीय समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल जी ने सभा को कहा कि हम उनके साथ, उन सभी 51 संस्थापक सदस्यों के परिजनों को भी ढूंढ रहे हैं, उनका भी सम्मान किये जाने का प्रयास रहेगा। यहां कोई पंथवाद नहीं, तीर्थक्षेत्र कमेटी सब की है। यहां से हम सब प्रेरणा लेकर जायें, हमें धर्म-तीर्थ-संस्कृति की रक्षा के लिए कुछ करना है। युवा कैसे संस्कृति से जुड़े, महिलायें – मंदिर – समाज के हर अंग को जोड़ा जाए, सभी का सहयोग जरूरी है। इसे आर्थिक रूप से भी मजबूत करें।

कोषाध्यक्ष अशोक जैन दोषी जी ने कहा कि मुनि-संतों के आशीर्वाद व मार्गदर्शन के साथ मंदिरों में गुल्लकें रखी जायें, वर्षायोग में तीर्थ सुरक्षा कलशों की स्थापना की जाये।

उपाध्यक्ष विजय जैन जी ने कहा कि अंचल ढांचे को मजबूत करें, मंदिरों को जोड़ें, घर-घर पहुंचे। तीर्थक्षेत्र कमेटी, आज की सबसे बड़ी संस्था होने के बावजूद 13-14 हजार मंदिरों को नहीं जोड़ पा रही। 125 वर्ष पुराने संविधान को समयानुसार बदलना होगा। हर अंचल अपने क्षेत्र तीर्थों का सर्वेक्षण कराये – दस्तावेज पूरे कराये। तीर्थक्षेत्र कमेटी की उपलब्धियों का पूरा प्रचार-प्रसार करें। सोशल मीडिया पर ध्यान दें।
आर्किटेक्ट आर सी जैनजी ने कहा कि विभिन्न समारोहों में बड़े-बड़े नेताओं को बुलाएं, उससे मीडिया कवरेज मिलेगा। गिनती में ज्यादा नहीं, एक-दो बड़ी मीटिंग करें।

दिल्ली अंचल अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन जी ने कहा कि पिछले 125 वर्षों में तीर्थक्षेत्र कमेटी तीर्थों की सुरक्षा व संवर्धन कर रही है। घर-घर तक तीर्थक्षेत्र कमेटी को पहुंचायें, युवाओं को जोड़ें।
मंत्री जयकुमार जैन जी ने जोर देकर कहा कि सभी मंदिरों को जोड़ें। तीर्थों के कागजों की कमी दूर हो। पहले मंदिर जुड़े, फिर व्यक्ति भी जुड़ेंगे। भारत सरकार के विभिन्न विभागों से सहयोग लें, उद्योगपति जुड़ें।

मंत्री डॉ. जीवन प्रकाश जैन जी ने बखूबी सभा संचालन किया और कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी ऐसा ध्वज है, जिसने सब तीर्थों की जान बचाकर रखी है। हर साधु चाहते हैं, तीर्थों की सुरक्षा हो व तीर्थक्षेत्र कमेटी को उनका सदा आशीर्वाद मिलता रहेगा।
कर्नाटक अंचल अध्यक्ष विनोद जैन बाकलीवाल जी ने कहा कि 125 साल बाद भी तीर्थक्षेत्र कमेटी पहचान से विमुख है। हर घर, हर मन तक तीर्थक्षेत्र कमेटी पहुंचे। विवादों के केस तीर्थक्षेत्र कमेटी लड़ रही है, पर जानकारी किसी को नहीं है। महिलाओं की शक्ति को नहीं पहचान रहे। महिला विंग की स्थापना करें। हर अंचल से मेम्बर बने, अभी केवल 9 हजार मेम्बर हैं।
मंत्री हंसमुख जैन गांधी जी ने कहा कि हर अंचल का कर्तव्य है कि आगे बढ़कर काम करे और 22 अक्टूबर 2026 को मथुरा से शुरू करके 22 अक्टूबर 2027 को शिखरजी में समापन तक सभी 9 अंचलों में विभिन्न संभावित आयोजनों की सूचना भी सभा में रखे और उन शहरों में मौजूद साधुओं के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
अनूप जैन जी एडवोकेट ने कहा कि 125 वर्ष की बुकलेट में पूरा इतिहास, उपलब्धियां देकर तैयार की जायें। यह पहले बंद कमरे की कमेटी रही, इसे वहां बाहर आर.के. जैन जी लाये। अंचल उत्सव विस्तृत कार्यक्रम है। फण्ड रेजिंग करनी होगी।
जैनेश जैन झांझरी जी ने कहा कि तीर्थ सर्वेक्षणों के लिए युवाओं को जोड़ें, कैसे उनका सदुपयोग किया जाये। हर अंचल में पदाधिकारियों की 125 वर्ष के संदर्भ में मीटिंग करनी चाहिए। सर्वेक्षण तीर्थों का शुरू हो चुका है।

मनोज जैन जी, आगरा ने सोशल मीडिया को मजबूती से उपयोग करने पर बल दिया।
हेमचंद जैन दिल्ली ने तीर्थों को, समाज को जोड़ने पर जोर दिया।
जीवेन्द्र जैन जी गाजियाबाद ने वर्तमान की सभी संस्थाओं का तीर्थक्षेत्र कमेटी के अंतर्गत समन्वय हो जाये। इसको पहले जीवंत रखा, अब हमें जीवंतता स्थापित करनी है। आज साधु वर्ग लीड कर रहा है। उनके साथ जुड़ना होगा।
कमल जैन जी ने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी की जानकारी सब तक नहीं पहुंच पाती। एक-एक करके सभी मंदिरों को जोड़ें। मंदिरों के जुड़ने से जनगणना में सहायता मिलेगी।

अपराजिता जैन (सान्ध्य महालक्ष्मी) ने तीर्थक्षेत्र कमेटी से महिलाओं को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। जितनी भी महिला सदस्य हैं, उनके ग्रुप बनायें, इनको कोई जानकारी नहीं मिलती। महिला मण्डलों को जोड़ें, वे प्रतिवर्ष 500/1000 रुपये का सहयोग कर सकती हैं। महिलाओं को बस थोड़ा सम्मान चाहिए। महिलाओं की आनलाइन मीटिंग की जा सकती है।

मीनू जैन जी ने सबसे पहले भारतवर्षीय दिगंबर जैन संघ के इतिहास पर एक डाक्यूमेंट्री की प्रस्तुति दी, जिसका गठन लौहार में हुआ, फिर 1930 में स्थापना हुई जिसका उद्देश्य शास्त्रार्थ और ज्ञान के संरक्षण के लिए हुआ था।

उपाध्यक्ष संजय जैन पापड़ीवाल जी ने कहा कि अगर तीर्थक्षेत्र कमेटी के लिए 100 करोड़ का टारगेट तीर्थों के संरक्षण के लिए रखा है, तो फिर 10 फीसदी प्रचार-प्रसार में लगाना होगा। अंचलों को एक्टिव होना होगा। अभी तक 9000 ही मेम्बर बने हैं, उनकी संख्या बढ़ानी होगी।
पूर्वांचल महामंत्री प्रभात जैन सेठी जी ने कहा कि आज नई संस्थायें अपने को राष्ट्रीय स्तर की कह रही हैं। कई लोग भ्रमित हो जाते हैं। 125वें साल में समाज को जोड़ना और सहयोग करना है। हर अंचल अपने क्षेत्र के तीर्थों की डोक्यूमेंट्री बना कर दे।

राजेश जैन जी पुष्पांजलि, दिल्ली ने पूरी तरह तीर्थक्षेत्र कमेटी के प्रति समर्पित रहने के साथ 11 लाख रुपये के सहयोग की घोषणा की। इसके साथ कई ने अपना-अपना सहयोग 125वें वर्ष के लिए देने की बात कही।
अंत में चैनल महालक्ष्मी ने पिछले 17 माह में इस संबंध में संतों के दर्शन, उनके आशीर्वाद के साथ उनके सुझाव, प्रेरणा सम्बंधित प्रेजेंटेशन की प्रस्तुति दी।
इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3576 में देखी जा सकती है।